कई दिनों तक चली राजनीतिक खींचतान, गहन विचार-विमर्श और अनिश्चितताओं के दौर के बाद केरल में मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के नेतृत्व वाली सरकार में विभागों का आवंटन आखिरकार बुधवार को पूरा हो गया। विभागों की इस अंतिम घोषणा के साथ ही राज्य की सियासत में एक नए और युवा अध्याय की औपचारिक शुरुआत हो गई है। केरल में इससे पहले साल 2011 में ओम्मन चांडी के नेतृत्व में कांग्रेस नीत यूडीएफ की सरकार बनी थी। इस नई कैबिनेट में कांग्रेस और यूडीएफ के भीतर एक बड़ा पीढ़ीगत बदलाव साफ तौर पर देखने को मिल रहा है, क्योंकि इस बार भारी संख्या में नए चेहरों को मंत्रिपरिषद में जगह दी गई है।
युवाओं और महिलाओं पर बड़ा दांव
इस नई कैबिनेट की सबसे खास बात यह है कि मुख्यमंत्री सतीशन सहित कुल 14 सदस्य पहली बार मंत्री पद की शपथ ले रहे हैं। इनमें से छह नेता तो ऐसे हैं जो पहली बार ही विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचे हैं। राजनीतिक विश्लेषक इसे यूडीएफ की ओर से अपनी एक युवा, आधुनिक और नई नेतृत्व वाली छवि पेश करने की सोची-समझी रणनीति मान रहे हैं। इसके साथ ही केरल की हालिया राजनीतिक परंपरा को बदलते हुए कांग्रेस ने पहली बार कैबिनेट में दो महिला मंत्रियों को शामिल कर बड़ा संदेश दिया है। इसमें वरिष्ठ कांग्रेस नेता बिंदु कृष्णा को श्रम विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, पलक्कड़ से कांग्रेस सांसद वीके श्रीकंदन की पत्नी केए तुलसी को अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग का जिम्मा मिला है। एक और नए चेहरे एम लिजू को आबकारी और सहकारिता जैसे बेहद भारी-भरकम विभाग सौंपे गए हैं।
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सहयोगी दल और गुटीय खींचतान का असर
मंत्रिमंडल में विभागों का यह अंतिम फैसला बेहद चुनौतीपूर्ण रहा, जिसे कई दिनों की लंबी बातचीत, आंतरिक गुटबाजी और सहयोगी दलों के भारी दबाव के बाद ही सुलझाया जा सका। सबसे ज्यादा विवाद मत्स्य पालन विभाग को लेकर खड़ा हुआ, जो आखिरकार 'इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग'के खाते में गया। लैटिन कैथोलिक चर्च ने सार्वजनिक रूप से इस फैसले का कड़ा विरोध किया था। चर्च की मांग थी कि तटीय समुदाय को मंत्रिमंडल में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलने के कारण यह विभाग कांग्रेस के पास ही रहना चाहिए। हालांकि, मुस्लिम लीग अपने रुख पर अड़ी रही।
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी का साफ कहना था कि यदि मत्स्य विभाग वापस लिया जाता है, तो बदले में उन्हें उच्च शिक्षा विभाग दिया जाए, जिसका कांग्रेस नेतृत्व और चर्च के कुछ धड़ों ने कड़ा विरोध किया। अंततः यूडीएफ ने यह विभाग मुस्लिम लीग के पास ही रहने दिया और वीई अब्दुल गफूर को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई।
इसके अलावा, कांग्रेस के अंदरूनी गुटीय समीकरण भी कैबिनेट गठन में देरी की बड़ी वजह बने। खासकर स्वास्थ्य विभाग को लेकर के मुरलीधरन और एपी अनिल कुमार के बीच अंतिम समय तक खींचतान चलती रही। अंत में मुरलीधरन को स्वास्थ्य और देवस्वम विभाग मिला, जबकि अनिल कुमार को राजस्व विभाग से संतोष करना पड़ा। मुख्यमंत्री सतीशन ने पुरानी परंपराओं से हटकर वित्त, कानून, सामान्य प्रशासन और बंदरगाह विभाग अपने पास ही सुरक्षित रखे हैं, जबकि गृह और सतर्कता विभाग की कमान वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला को सौंपी गई है। अन्य प्रमुख विभागों में पीके कुन्हालीकुट्टी को उद्योग और आईटी, पीसी विष्णुनाथ को पर्यटन, संस्कृति और सिनेमा तथा केएम शाजी को स्थानीय स्वशासन विभाग दिया गया है।
जी सुधाकरण बने प्रोटेम स्पीकर
इसी बीच, माकपा के बागी नेता जी सुधाकरण ने बुधवार को केरल विधानसभा के 16वें कार्यकाल के प्रोटेम स्पीकर के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। सुधाकरण इस बार यूडीएफ के समर्थन से अंबालापुझा सीट से चुनाव जीतकर आए हैं। उन्हें राजभवन में राज्यपाल राजेंद्र वी आर्लेकर ने शपथ दिलाई। गुरुवार को सभी नवनिर्वाचित विधायक प्रोटेम स्पीकर जी सुधाकरण की मौजूदगी में सदन की सदस्यता की शपथ ग्रहण करेंगे।