केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन
- फोटो : एएनआई (फाइल)
केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने बुधवार को बताया कि राज्य मंत्रिमंडल ने वायनाड के भूस्खलन पीड़ितों के लिए पुनर्वास योजना को मंजूरी दी है। वायनाड के कुछ इलाकों में पिछले साल 30 जुलाई को भूस्खलन हुआ था। मुख्यमंमत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पुनर्वास का मतलब केवल घरों की मरम्मत नहीं है, बल्कि लोगों की आजीविका को फिर से बहाल करना भी है।
चाय बागानों में बनाएंगे कस्बा: मुख्यमंत्री
विजयन ने कहा, 'आज मंत्रिमंडल की बैठक में वायनाड पुनर्वास योजना पर चर्चा की गई। इससे पहले, मंत्रिमंडल की एक विशेष बैठक में इस मुद्दे पर विचार किया गया था। पुनर्वास का मतलब उनकी आजीविका को फिर से खड़ा करना भी है। हम एलस्टोन एस्टेट और नेडुम्पाला एस्टेट में कस्बा बनाएंगे। एलस्टोन टी एस्टेट पांच फीसदी भूमि दी जाएगी और नेडुम्पाला एस्टेट में 10 फीसदी भूमि आवंटित की जाएगी।' एलस्टोन एस्टेट और नेडुम्पाला एस्टेट दोनों वायनाड जिले में स्थित चाय बागान हैं।
25 जनवरी तक जारी की जाएगी सूची
उन्होंने आगे बताया कि पीड़ितों की अंतिम सूची 25 जनवरी 2025 तक जारी कर दी जाएगी। उन्होंने कहा, इस कस्बे में बाजार, शिक्षण संस्थान, अस्पताल और मनोरंजन केंद्र जैसी सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। हम घरों के डिजाइन को उनकी नींव के आधार पर तैयार कर रहे हैं। अंतिम लाभार्थियों की सूची 25 जनवरी से पहले तय कर दी जाएगी।
मेप्पडी में भूस्खलन एक गंभीर आपदा: केंद्र सरकार
इससे पहले केंद्र ने केरल सरकार को सूचित किया था कि वायनाड जिले के मेप्पडी भूस्खलन को अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल ने एक गंभीर आपदा माना है। केंद्र सरकार ने बताया कि मेप्पडी भूस्खलन की तीव्रता और पैमाने को देखते हुए इसे इसे गंभीर प्रकृति की आपदा माना है। इसके बाद कांग्रेस की केरल इकाई ने इस सूचना को 30 दिसंबर को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया खातों पर साझा की थी।
प्रियंका गांधी ने की थी मदद की अपील
वायनाड सांसद प्रियंका गांधी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र से वायनाड के भूस्खलन पीड़ितों को तत्काल राहत देने की मांग की थी। प्रियंका गांधी ने कहा था, यह क्षेत्र पूरी तरह से तबाह हो चुका है। यहां के लोग सब कुछ खो चुके हैं। अगर केंद्र इस स्थिति में मदद नहीं करता है, तो इससे पूरे देश और खासकर पीडितों में गलत संदेश जाएगा। 30 जुलाई 2024 को केरल में राज्य के इतिहास का सबसे जानलेवा भूस्खलन हुआ था, जिसमें 300 से अधिक लोग मारे गए थे और कई घरों और भवनों को भारी नुकसान पहुंचा था। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र मुण्डक्कई और चूरालमाला थे।
संबंधित वीडियो-