एक बैंक अधिकारी ने ही जनार्दन और उनके दान की जानकारी सोशल मीडिया पर सबसे पहले शेयर की थी। जर्नादन कानों से सुन नहीं सकते हैं, ऐसे में बैंक अधिकारियों ने दो लाख दान की बात पर हैरानी जताते हुए इशारों में पूछा कि सारा पैसा दान कर देंगे, तो खुद जिंदगी कैसे बसर करेंगे। जवाब में उन्होंने कहा कि उनकी जरूरतें बीड़ी बनाने के काम और विकलांग पेंशन से पूरी हो जाती हैं। उन्हें इससे ज्यादा की जरूरत नहीं है। इसके बाद से लोग जर्नादन की दरियादिली प्रशंसा करते नहीं थक रहे हैं।