Kerala Assembly Elections: यूडीएफ ने दस साल बाद केरल में सत्ता में वापसी का मार्ग प्रशस्त किया है। एलडीएफ को मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व में हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस के मजबूत प्रदर्शन से पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह है। पढे़ं, केरल में यूडीएफ गठबंधन की जीत के पांच बड़े कारण..,
कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) केरल विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत की ओर बढ़ रहा है। मतगणना के रुझान दस साल बाद सत्ता में वापसी का संकेत दे रहे हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) के शासन का अंत होगा।
कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी
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चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 140 सीटों वाली विधानसभा में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) 63 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इसके बाद CPI(M) ने 26 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि IUML को 22 सीटें मिली हैं। CPI के खाते में 8 सीटें और केरल कांग्रेस (KEC) को 7 सीटें मिली हैं। RSP ने 3 सीटों पर जीत हासिल की है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) को भी 3 सीटों से संतोष करना पड़ा है। इसके अलावा RJD, RMPOI, KEC(J), CMPKSC और निर्दलीय उम्मीदवारों को मिलाकर कुल 7 सीटें मिली हैं। मौजूदा नतीजे राज्य में एक बार फिर गठबंधन की मजबूरी वाली राजनीति की तस्वीर दिखा रहे हैं, जहां किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत हासिल होता नजर नहीं आ रहा है।
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केरल में विधानसभा चुनाव और मतदान प्रतिशत
विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 9 अप्रैल को 140 निर्वाचन क्षेत्रों में हुआ था। इसमें 78.27 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। चुनाव आयोग के अनुसार, कुल 883 उम्मीदवार मैदान में थे। मतगणना प्रक्रिया कड़ी सुरक्षा के बीच जारी है।
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केरल में यूडीएफ गठबंधन की जीत के कारण
एलडीएफ सरकार को अपनी कमजोरियों के चलते हार का सामना करना पड़ा। सत्ता विरोधी लहर और भ्रष्टाचार के आरोपों ने एलडीएफ की छवि को गहरा नुकसान पहुंचाया। एलडीएफ सरकार को 10 साल के शासन के बाद स्वाभाविक सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ा। हालांकि, दूसरे कार्यकाल में कोरोना महामारी के दौरान किए गए अच्छे कार्यों से कुछ हद तक फायदा मिला था। लेकिन, सबरीमाला सोना चोरी विवाद ने सरकार की प्रतिष्ठा को धूमिल किया। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और उनके दामाद-बेटी पर भ्रष्टाचार के सीधे आरोप लगे। इन आरोपों से मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत छवि भी काफी खराब हुई, जिससे पार्टी को नुकसान हुआ। इन घटनाओं ने सरकार की जनधारणा को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया।
कांग्रेस की एकजुटता और वापसी
केरल में कांग्रेस पार्टी ने अपनी आंतरिक एकजुटता बनाए रखी। वीडी सतीशन, एके एंटनी और शशि थरूर जैसे प्रमुख नेताओं ने मिलकर काम किया। वायनाड में हुए एक हादसे ने एलडीएफ सरकार की कमजोरियों को उजागर किया।वायनाड हादसे के बाद राहुल और प्रियंका के लगातार दौरों ने पार्टी को मजबूती दी। इन प्रयासों से कांग्रेस जनता के बीच अपनी खोई हुई पकड़ फिर से बनाने में सफल रही।