इन चुनावों में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेतृत्व में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) की सरकार बनी थी। वहीं, इस गठबंधन ने 140 में से 99 सीटों पर जीत दर्ज की थी और पिनरई विजयन मुख्यमंत्री बने थे। दूसरी तरफ यूडीएफ को बाकी बची 41 सीटों पर जीत मिली। यह पिछले चुनाव के मुकाबले छह सीटों की गिरावट थी। इसके अलावा एनडीए अपनी एकमात्र सीट भी इस चुनाव में हार गई और उसके वोट शेयर में भी गिरावट आई।
यह 1977 के बाद पहला मौका था जब केरल में किसी गठबंधन ने लगातार दूसरी बार सरकार बनाई हो, जिससे राज्य में हर पांच साल में सरकार बदलने का दशकों पुराना ट्रेंड टूट गया। इसके अलावा पिनरई विजयन पांच साल का पूर्ण कार्यकाल पूरा करने के बाद फिर से चुने जाने वाले केरल के पहले मुख्यमंत्री बने। इस चुनाव में राज्य की पहली ट्रांसजेंडर उम्मीदवार (अनन्या कुमारी एलेक्स) ने भी पर्चा भरा था।
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