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केरल: बारी-बारी से सत्ता पाने की परंपरा रहेगी या टूटेगी

Tue, 06 Apr 2021 06:30 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

  • एलडीएफ और यूडीएफ में बाजी किसकी, भाजपा ने भी जगह बनाने के लिए ताकत झोंकी
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मुख्यमंत्री पिनराई विजयन (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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विस्तार
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केरल विधानसभा की सभी 140 सीटों पर मंगलवार को एक ही चरण में मतदान होगा। मुख्य मुकाबला माकपा के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) और कांग्रेस की अगुवाई वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के बीच है। सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या एलडीएफ और यूडीएफ के बीच हर पांच साल बाद बारी-बारी से सरकार बनाने की परंपरा में कांग्रेस का गठजोड़ जीतेगा या वाम मोर्चा फिर बाजी मारेगा।

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केरल में 957 उम्मीदवार भाग्य आजमा रहे हैं। देश में सबसे पहली गैर कांग्रेसी और वामपंथी सरकार केरल में ही बनी थी। तभी से कांग्रेस और वाम गठबंधनों के बीच टक्कर होती आ रही है। केरल के मतदाता आमतौर पर पांच साल में सरकार बदल देते हैं। मौजूदा पिनराई विजयन सरकार को हटाने के लिए हालांकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका ने बंगाल का मोर्चा छोड़कर केरल में जमकर पसीना बहाया है। भाजपा ने भी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत भाजपा के सभी प्रमुख नेताओं ने केरल में सभाएं कीं। सीए विजयन सत्ता में लौटे तो केरल की दशकों पुरानी राजनीतिक परंपरा पर विराम लग जाएगा। 

वाम गठजोड़ में पिनराई ही चेहरा, कांग्रेस में असमंजस
सीएम विजयन ही वाम गठजोड़ का चेहरा हैं। दूसरी तरफ यूडीएफ में पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी या नेता प्रतिपक्ष रमेश चेन्निथला के विवाद के चलते किसी चेहरे को आगे नहीं किया।  यहां कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने खूब पसीना बहाया।
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सबरीमाला और घोटाले का छाया रहा मुद्दा
एलडीएफ ने फोकस विकास और कल्याणकारी योजनाओं पर रखा। लेकिन, सोना तस्करी घोटाला और परिवारवाद की छाया ने पीछा नहीं छोड़ा। उधर, यूडीएफ और एनडीए सबरीमाला पर सरकार की घेराबंदी की। भाजपा ने लव जिहाद के मुद्दे पर ईसाई वोटरों को साधने का प्रयास किया। 2016 में एक सीट जीतने वाली भाजपा का मकसद सीट संख्या बढ़ाना है। मेट्रोमैन के नाम से मशहूर ई श्रीधरन को पलक्कड़ से खड़ा करके भाजपा ने विकास के लिए प्रतिबद्धता का संकेत दिया है।

समीकरणों का खेल
यूडीएफ ने एलडीएफ सरकार की अमेरिकी कंपनी से संधि को लेकर नाराज मछुआरों को साधने का प्रयास किया है। वहीं, नायर और एझावा समुदायों पर प्रभाव रखने वाली नायर सर्विस सोसायटी (एनएसएस)आैर श्रीनारायण धर्म परिपालनायोगम (एसएनडीपीवाई) का रुख लेफ्ट को झटका दे सकता है। ईसाई बहुल मध्य केरल यूडीएफ का गढ़ है। लेकिन जोशके मणि के साथ से एलडीएफ उत्साहित है।

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