माना जा रहा है कि पार्टी की इसी रणनीति के अंतर्गत चुनिंदा विधानसभा क्षेत्रों में चेहरों को बदला जा रहा है। दरअसल, इसका संकेत तब भी मिला था जब जब अरविंद केजरीवाल ने किराड़ी विधानसभा सीट से अपने दो बार के जीते विधायक ऋतुराज गोविंद का टिकट काटने का ऐलान कर दिया था। केजरीवाल ने ऋतुराज गोविंद की जगह उन्हीं अनिल झा को अपना प्रत्याशी बनाया है जो ऋुतुराज से ही 2015 और 2020 में दो बार चुनाव हार चुके हैं।
इसके भी पहले जब आम आदमी पार्टी ने अपनी पहलू सूची प्रकाशित की थी, तब उनमें भी तीन विधायकों का टिकट काट दिया गया था। इसमें ऋतुराज के अलावा सीलमपुर से अब्दुल रहमान और मटियाला से गुलाब सिंह यादव का नाम शामिल था। केजरीवाल ने अपने नेताओं-विधायकों को छोड़ उन नेताओं पर ज्यादा भरोसा जताया था जो हाल ही में कांग्रेस या भाजपा छोड़कर हाल ही में आम आदमी पार्टी में आए थे। किराड़ी से अनिल झा ऐसे ही उम्मीदवार थे।
बड़े चेहरों का क्षेत्र बदलेगा
चर्चा है कि एंटी इनकंबेंसी फैक्टर को मात देने के लिए पार्टी कई बड़े चेहरों का चुनाव क्षेत्र बदल सकती है। इसमें पटपड़गंज से पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का नाम भी शामिल हो सकता है। पिछले चुनाव में भाजपा के रविंदर सिंह नेगी ने उन्हें कड़ी टक्कर दी थी और बिल्कल कांटे के मुकाबले में केवल तीन हजार वोटों के करीब से वे हार गए थे। नेगी इस बार भी पटपड़गंज क्षेत्र से अच्छी तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में वर्तमान हालात में मनीष सिसोदिया को कड़ी टक्कर मिल सकती है।
माना जा रहा है कि, इसे देखते हुए पार्टी सिसोदिया को आसपास की किसी सीट से मैदान में उतार सकती है। इसी तरह पार्टी के कुछ और चेहरों पर भी कयासबाजी जारी है और चुनाव आने तक कई बड़े उलटफेर देखने को मिल सकते हैं। भाजपा के बागी नेता जितेंद्र सिंह शंटी हाल ही में अपनी पार्टी छोड़ आम आदमी पार्टी में शामिल हुए हैं। माना जा रहा है कि उन्हें भी पूर्वी दिल्ली की किसी सीट से प्रत्याशी बनाया जा सकता है। इसके पहले लक्ष्मीनगर से भी आम आदमी पार्टी ने भाजपा से आए बीबी त्यागी को मैदान में उतारने की घोषणा कर दी है। प्रमुख सीटों पर चेहरों को बदलने की यह रणनीति अरविंद केजरीवाल के लिए कितनी कारगर साबित होती है, यह चुनाव परिणाम सामने आने के बाद ही पता चल पाएगा।