लोकसभा चुनाव से पूर्व गैर भाजपा दलों का महागठबंधन बनाने की योजना पर काम कर रही कांग्रेस की उलझन सीएम अरविंद केजरीवाल और एलजी अनिल बैजल की जंग ने बढ़ा दी है। केजरीवाल के समर्थन में चार गैरकांग्रेसी मुख्यमंत्रियों के मोर्चा खोलने से इस मुद्दे पर आप सरकार का विरोध कर रही कांग्रेस सकते में है। अचानक जिस आक्रामक तेवरों से पश्चिम बंगाल, आंध्रप्रदेश, केरल और कर्नाटक के सीएम केजरीवाल के समर्थन में उतरे हैं, उससे कांग्रेस को महागठबंधन बनाने के अभियान में पलीता लगने का डर सता रहा है।
यही कारण है कि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने इस मामले में पहले केजरीवाल का विरोध कर रही राज्य इकाई को चुप्पी साधने का निर्देश दिया है। शनिवार को सियासी तस्वीर तब पलट गई जब चार मुख्यमंत्रियों ममता बनर्जी, चंद्रबाबू नायडू, पी. विजयन और एचडी कुमारस्वामी ने केजरीवाल के पक्ष में मोर्चा खोल दिया। रविवार को भी इन मुख्यमंत्रियों ने पीएम मोदी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह के समक्ष इस मामले को उठाया। पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी कांग्रेस के रवैये पर अपनी नाराजगी का इजहार करने से नहीं चूकी। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता कि कांग्रेस इस मामले में केजरीवाल के पक्ष में क्यों नहीं खड़ी हो रही? इसके पीछे कांग्रेस की क्या राजनीति है यह कांग्रेस की बताएगी।
कांग्रेस के सामने दिल्ली का भी संकट
कांग्रेस के सामने इस मामले को लेकर दिल्ली का भी संकट है। अगर इस मुद्दे पर पार्टी केजरीवाल के पक्ष में खड़ी हुई तो वह राज्य में अपना खोया आधार हासिल नहीं कर पाएगी। गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के परंपरागत मतदाता वर्ग में ही पैठ बढ़ा कर करिश्माई जीत हासिल करने में सफल रही थी।