दिल्ली के सभी प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के प्रस्ताव को आज शुक्रवार को कैबिनेट ने अपनी मंजूरी दे दी। सरकार शीघ्र इस फैसले को अमल में लाएगी। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा में आज इसकी जानकारी दी।
सीएम केजरीवाल ने सदन में जानकारी देते हुए कहा कि पूरी दिल्ली में लगातार असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। महिलाएं और बच्चे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। केंद्र लोगों को सुरक्षा देने में नाकाम रही है। ऐसे समय में राजधानी में सीसीटीवी लगाने से पुलिस को अपराधियों को पहचानने, ट्रैक करने और सजा दिलाने में आसानी होगी। लोगों में सुरक्षा की भावना बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि उनके इस फैसले से भाजपा-कांग्रेस के नेताओं के द्वारा चुनाव के समय पैसा-दारु नहीं बांटा जा सकेगा, इसीलिए वे इसका विरोध कर रहे हैं।
आज भी रोकने का हुआ प्रयास
अरविंद केजरीवाल सरकार की हमेशा यह शिकायत रही है कि केंद्र सरकार उसे काम नहीं करने दे रही है। उसकी योजनाओं को तकनीकी पहलुओं का हवाला देकर बार-बार टालने की कोशिश हो रही है। सदन में उन्होंने यह बताकर सबको हैरान कर दिया कि कैबिनेट के द्वारा यह फैसला लिए जाने के बाद आज भी मुख्य सचिव अंशु प्रकाश ने इस फैसले में 'जल्दी करने' की बात कही है।
केजरीवाल ने कहा कि उनकी सरकार बनने के कुछ ही दिन बाद अक्टूबर 2015 में उन्होंने इस फैसले को लागू करने का प्रयास किया था। लेकिन उनके इस कार्य को पहले दिल्ली के अफसरों द्वारा और फिर एलजी के द्वारा रोकने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि जो लोग बंदूक के लाइसेंस भी नहीं दे पा रहे हैं, वे सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए भी लाइसेंस लेने को अनिवार्य बनाने की बात कह रहे हैं। ऐसा सिर्फ इसलिए कहा जा रहा था जिससे योजना में देरी हो।
विपक्ष ने कहा, सरकार खुद जिम्मेदार
नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि सरकार देरी के लिए किसी अन्य पर आरोप नहीं लगा सकती क्योंकि देरी के लिए वह खुद जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि जिस फैसले को कैबिनेट ने आज लिया है, उसे आज के पहले लेने से उसे कौन रोक रहा था।