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Kejariwal Hindutva Card: केजरीवाल की कितनी मदद करेंगे ‘लक्ष्मी-गणेश’, गुजरात में हुए नुकसान की होगी भरपाई?

अमित शर्मा
Updated Wed, 26 Oct 2022 11:29 PM IST

सार

भारतीय रुपये पर गणेश और लक्ष्मी की छवि अंकित करने की केजरीवाल की मांग को हालिया सियासी घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि यह केजरीवाल का बहुत सोचा-समझा दांव है।
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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल - फोटो : social media


भारतीय रुपये पर गणेश और लक्ष्मी की छवि अंकित करने की केजरीवाल की मांग को इस सियासी घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि यह केजरीवाल का बहुत सोचा-समझा दांव है। इसके जरिए वे न केवल राजेंद्र पाल गौतम और गुजरात आम आदमी पार्टी के चीफ गोपाल इटालिया के हिंदू विरोधी बयानों से हुए नुकसान की भरपाई करना चाहते हैं, बल्कि हिंदुत्ववादी राजनीति के अखाड़े में अपने पांव मजबूती से जमाए रखना चाहते हैं। लेकिन क्या इससे गौतम और इटालिया के बयानों से हुए नुकसान की भरपाई हो सकेगी?


केजरीवाल के द्वारा नोटों पर गणेश-लक्ष्मी की छवि अंकित करने की मांग को मुद्दों से भटकाने की राजनीति बताया है। मनोज तिवारी ने आरोप लगाया है कि अरविंद केजरीवाल उस एक भी कार्य में सफल नहीं साबित हुए जिसके लिए जनता ने उन्हें मुख्यमंत्री बनने का अवसर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल अब तक न यमुना सफाई का कार्य पूरा कर सके और न ही लोगों को प्रदूषण से मुक्ति दिला सके। छठ पूजा के समय उनसे कोई यमुना की सफाई पर सवाल न पूछे, और गंभीर प्रदूषण पर कोई सवाल न पूछ सके, इसके लिए वे लोगों का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के मुद्दे उछालते हैं।




अवसरवादी धार्मिक कार्ड खेलते हैं केजरीवाल

दिल्ली भाजपा के महामंत्री हर्ष मल्होत्रा ने अमर उजाला से कहा कि अरविंद केजरीवाल ‘धार्मिक  अवसरवादी’ हैं। जब जिससे लाभ मिलता दिखाई पड़ता है, वे उसी रूप में स्वयं को पेश कर देते हैं। उन्होंने कहा कि एक मुख्यमंत्री के रूप में केजरीवाल को सभी धर्मों और सम्प्रदायों के साथ एक सामान व्यवहार करना चाहिए, लेकिन दिल्ली में वे सभी मस्जिदों के धर्म गुरुओं को प्रतिमाह आर्थिक सहायता उपलब्ध कराते हैं, लेकिन वे यही लाभ हिंदू और बौद्ध धर्मगुरुओं को नहीं देते। उन्होंने कहा कि केजरीवाल की यह सोच सामने आते ही उनका हिंदूवादी चेहरे की असलियत सामने आ जाती है। बीजेपी नेताओं का मानना है कि केजरीवाल इस तरह के बयान देकर राजेंद्र पाल गौतम और गोपाल इटालिया के बयानों से लोगों का ध्यान भटकाने में कामयाब नहीं हो सकेंगे और उन्हें इसका गुजरात में कोई राजनीतिक लाभ नहीं होगा।


एंटी-हिंदू छवि नहीं चिपका पाई भाजपा

राजनीतिक विश्लेषक सुनील पाण्डेय ने अमर उजाला से कहा कि आरएसएस-भाजपा ने देश में हिंदुत्ववादी राजनीति का एक नया मापदंड तय कर दिया है। अब इस खेल में टिके रहने के लिए हिंदू मतदाताओं की उपेक्षा करना संभव नहीं है। केजरीवाल इस बात को बखूबी समझ रहे हैं, लिहाजा समय-समय पर वे कुछ उपक्रम कर स्वयं को बड़ा हिंदू साबित करने की कोशिश करते रहते हैं। भारतीय रुपयों पर गणेश-लक्ष्मी की छवि अंकित करने की उनकी मांग इसी दिशा में उठाया गया कदम है। चूंकि, केजरीवाल लंबे समय में भाजपा के सामने राष्ट्रीय विकल्प ले रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं, ऐसा करना उनके लिए जरूरी भी है। उनकी इसी सोच का कारण है कि भाजपा केजरीवाल को एंटी-हिंदू चेहरे के रूप में स्थापित नहीं कर पाई।


लेकिन यह ध्यान रखना चाहिए कि वे केवल हिंदुत्व कार्ड के सहारे केजरीवाल भाजपा को घेरने में सफल नहीं होंगे। हिंदुत्व के मुद्दे पर वोट करने वाले मतदाताओं के लिए भाजपा उनसे ज्यादा विश्वसनीय ब्रांड के रूप में पहले से मौजूद है। ऐसे में उन्हें हिंदुत्व के साथ अतिरिक्त मुद्दों से स्वयं को जनता से जोड़ना होगा। शिक्षा और स्वास्थ्य उनके लिए इसी प्रकार के मुद्दे साबित हो सकते हैं।



 
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