लोकसभा में शुक्रवार को रेलवे की संसदीय स्थायी समिति ने रिपोर्ट पेश करते हुए रेल ट्रैक पर कवच लगाने की धीमी गति को लेकर चिंता जाहिर की। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कवच लगाने के कामों में तेजी लाने और सही कीमत पर यात्रियों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने की सिफारिश की।
रेलवे की अनुदान मांगों पर अपनी रिपोर्ट में संसदीय समिति ने कहा कि दक्षिण मध्य रेलवे में अब तक केवल 1465 किमी और उत्तर मध्य रेलवे के 80 किमी मार्ग पर कवच लगाया जा सका है। समिति ने यह भी कहा कि दिल्ली-चेन्नई, मुंबई-चेन्नई और अन्य महत्वपूर्ण कॉरिडोर में कवच लगाने के लिए निविदाएं मांगी गईं हैं, लेकिन रेलवे नेटवर्क में तेजी से कवच लगाने का काम किया जाए। खानपान सेवा में रेलवे को लगातार हो रहे घाटे को लेकर समिति ने कहा कि इसे भी जल्दी से समाप्त किया जाए और प्रतिस्पर्धी कीमतों पर गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने का प्रयास करना चाहिए।
अपनी रिपोर्ट पेश करने से पहले समिति ने रेल मंत्रालय की ओर से दिए गए तथ्यों और आंकड़ों की जांच की। मंत्रालय ने समिति को वित्तीय प्रदर्शन, शुद्ध राजस्व और परिचालन अनुपात, 2024-25 के लिए वार्षिक योजना, वार्षिक लक्ष्य और उपलब्धियां, सड़क सुरक्षा कार्य और अन्य मामलों को लेकर दिए थे।
किराये की समीक्षा करने की भी जरूरत
समिति ने वर्ष 2024-25 के लिए यात्री राजस्व के बजट अनुमानों को देखा। रेलवे ने 180000 करोड़ रुपये के माल ढुलाई राजस्व अनुमानों के मुकाबले 80000 करोड़ रुपये यात्री राजस्व का अनुमान रखा है। इसे लेकर समिति ने कहा कि रेलवे को विभिन्न ट्रेनों और श्रेणियों में यात्री किराये की समीक्षा करनी चाहिए। समिति ने कहा कि रेलवे के बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण के लिए बड़े निवेश की आवश्यकता है और इसमें सुधार किया जाना चाहिए।
समिति ने कहा कि रेलवे के व्यय में वृद्धि की जरूरत को देखते हुए मंत्रालय को बुनियादी ढांचे के निर्माण में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के तरीके खोजने चाहिए। रेलवे विज्ञापन स्थानों और अपनी भूमि का उपयोग करके राजस्व बढ़ाने के लिए बाहरी एजेंसियों की सहायता ले सकता है।
भूमि अधिग्रहण परियोजनाओं में देरी का कारण
संसदीय समिति का यह भी मानना है कि रेलवे परियोजनाओं में देरी का बड़ा कारण भूमि अधिग्रहण है। इसलिए रेलवे को भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए संभावित नीति संशोधनों पर विचार करना चाहिए। इसके लिए भूमि संबंधी मुद्दों को हल करने और समय पर भूमि अधिग्रहण की गारंटी देने के लिए राज्य सरकारों के साथ लगातार संपर्क में रहना चाहिए।
समिति ने कहा कि रेलवे की नई नीति के तहत राज्य सरकारों की प्रतिक्रिया की कमी के कारण रुके हुए पुराने स्वीकृत कार्यों को रेलवे की 100 प्रतिशत लागत पर लिया जा सकता है। लेकिन रेलवे ने पिछले तीन साल में किसी भी आरओबी और आरयूबी को पूरा नहीं किया है। समिति ने कहा कि वर्ष 2023-24 में 1,100 आरओबी/आरयूबी के निर्माण के लक्ष्य के मुकाबले केवल 1078 आरओबी/आरयूबी का काम पूरा हुआ। समिति ने कहा कि रेल मंत्रालय आने वाले वर्षों में आरओबी/आरयूबी से संबंधित अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए शुरू किए गए उपायों पर काम करे।
मंत्रालय ने बताईं उपलब्धियां
रेल मंत्रालय ने भी स्थायी समिति को अपनी उपलब्धियों की जानकारी दी। इसमें ऊर्जा, खनिज, सीमेंट, बंदरगाह संपर्क, यातायात घनत्व बढ़ाने के लिए नए कॉरिडोर का निर्माण शामिल है। मंत्रालय ने कहा कि पीएम गति शक्ति मिशन के तहत मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी की दिशा में यह काम हुए हैं। समिति ने कहा कि रेलवे अपने बजट का एक बड़ा हिस्सा तीन आर्थिक रेलवे कॉरिडोर के निर्माण पर खर्च किया है। समिति ने कहा कि मंत्रालय यह सुनिश्चित करे सभी कॉरिडोर का निर्माण तय समयसीमा में पूरा हो और इनके विकास को प्राथमिकता दी जाए।
इसके साथ ही समिति ने 2023-24 में कोचों के उत्पादन के लक्ष्य को पूरा नहीं करने पर आपत्ति जाहिर की। मंत्रालय को कहा कि वह उत्पादन इकाइयों में कोचों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए तत्काल कदम उठाए। स्टेशनों के विकास की पहल को लेकर समिति ने स्टेशन पुनर्विकास कार्यों के लिए बजट और आंतरिक संसाधनों पर निर्भरता कम करने के लिए कहा। इसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।