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कठुआ गैंगरेप : SC ने निचली अदालत के ट्रायल पर लगाई 7 मई तक रोक

Fri, 27 Apr 2018 03:24 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कठुआ बलात्कार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को निचली अदालत में चल रही सुनवाई पर रोक लगा दी है। इस मामले में अगली सुनवाई अब 7 मई को होगी। आज केस ट्रांसफर करने वाली याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने  कहा कि आरोपियों को भी अपना पक्ष रखने का अधिकार है। कोर्ट ने आरोपियों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 7 मई तक का समय दिया है।
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बता दें कि इस मामले में अदालत के पास इसका ट्रायल चंडीगढ़ शिफ्ट करने और मामले को CBI को देने संबंधी याचिकाएं मिली हैं। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस मल्होत्रा की पीठ ने कहा कि वो दोनों याचिकाओं को सुनेंगे।

 कठुआ गैंग रेप मामले में पीड़ित की पिता की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी किया था। पीड़ित के पिता सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर केस को जम्मू कश्मीर से बाहर ट्रांसफर करने की मांग की है।
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याचिका में पिता ने मांग की है कि केस को चंडीगढ़ ट्रांसफर कर दिया जाए क्योंकि जम्मू में केस का ट्रायल सही से नहीं हो पाएगा। याचिका में यह भी मांग की गई है कि नेताओं को नाबालिग आरोपी से मिलने से रोका जाए।  जांच की प्रगति रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी जाए और  साथ ही यह भी मांग की गई है कि कठुआ की अदालत तब तक इस मामले की सुनवाई न करे जब तक सुप्रीम कोर्ट केस को ट्रान्सफर करने को लेकर दाखिल याचिका का निपटारा न कर दें।
 

कोर्ट कठुआ गैंगरेप के मुख्य आरोपी संजी राम और उसके बेटे विशाल की याचिका पर भी सुनवाई करेगा। आरोपी संजी राम ने याचिका में केस को जम्मू-कश्मीर से ट्रांसफर करने का विरोध करते हुए कहा है कि केवल शिकायतकर्ता की सुविधा के लिये केस को जम्मू से बाहर ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। 
 

याचिका में उसने यह भी कहा है कि  उसे गलत तरीके से फंसाया जा रहा है। उसने कोर्ट से दरख्वास्त की है कि केस को जम्मू से किसी दूसरे राज्य में ट्रांसफर करने से पहले उसका पक्ष भी सुना जाना चाहिए।
 

 


 
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कठुआ कांड में असल चिंता उचित और निष्पक्ष सुनवाई

वहीं  बृहस्पतिवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सख्त चेतावनी देते हुए को कहा कि कठुआ कांड में असल चिंता उचित और निष्पक्ष सुनवाई को लेकर है। यदि इसकी निष्पक्ष सुनवाई पर मामूली संदेह भी पाया गया तो मामले को जम्मू कश्मीर की अदालत से बाहर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। 
 
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह बात बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) की समिति की रिपोर्ट दर्ज कराने पर कही थी। बीसीआई समिति ने मामले की सीबीआई जांच कराने की वकील संगठन की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि कठुआ के बार संघ ने पुलिस या वकील की कार्रवाई में किसी तरह का अवरोध पैदा नहीं किया।

रिपोर्ट पाने के बाद शीर्ष अदालत ने कहा कि वह निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए मुख्य मुद्दे से नहीं भटकेगी। पीड़ित के परिवार और आरोपी दोनों के लिए निष्पक्ष सुनवाई होनी चाहिए। इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने के आरोप पर पीठ ने कहा कि यदि वकील दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।
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