जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आठ वर्षीय बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या के एक नाबालिग आरोपी के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को रोक लगा दी।
पतवालिया ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन की ओर से दलील रखते हुए कहा था कि बीते साल 11 अक्तूबर को हाईकोर्ट ने 27 मार्च, 2018 के निचली अदालत के आदेश पर गलती से मुहर लगा दी थी।
10 जनवरी, 2018 को कठुआ की एक बच्ची का अपहरण कर लिया गया था। फिर सामूहिक दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने दरिंदगी के इस मामले को 10 मई, 2018 को कठुआ से पठानकोट (पंजाब) हस्तांतरित कर दिया था।
पठानकोट की विशेष अदालत ने बीते साल 10 जून को एक मंदिर के पुजारी सांझीराम समेत तीन मुख्य आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जबकि मामले में सुबूत मिटाने के लिए तीन पुलिसवालों को पांच वर्ष जेल की सजा और 50-50 हजार जुर्माने की सजा सुनाई थी। वहीं, सांझीराम के बेटे विशाल को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया था।