पुलवामा आतंकी हमले के बाद कश्मीरियों पर हो रहे हमलों का एक और मामला पुणे से सामने आया है। यहां 24 वर्षीय पत्रकार जिबरन नजीर को पीटा गया है। वहीं मामले पर स्थानीय पुलिस का कहना है कि पुलवामा हमले को लेकर उसे नहीं पीटा गया बल्कि यह रोड रेज (यातायात में सड़क पर चालकों द्वारा हिंसक रोष व्यक्त करना) का मामला है।
पुलिस ने शुक्रवार को कहा कि पत्रकार की गुरुवार की रात ट्रैफिक सिग्नल को लेकर हुए झगड़े के कारण दो लोगों ने पिटाई कर दी। नजीर पुणे के एक अखबार में काम करता है। नजीर का कहना है कि हमलावर उनसे कह रहे थे कि वह उसे वापस कश्मीर भेज देंगे। उसने साथ ही ये भी कहा कि ये कोई संगठित हमला नहीं था।
नजीर ने कहा कि हमलावरों ने बाद में पुलिस स्टेशन में उससे माफी भी मांगी। पुलिस अधिकारी ने कहा कि ये रोड रेज का मामला था। इसका पुलवामा हमले से कोई संबंध नहीं है। इस घटना से एक दिन पहले बुधवार को यवतमाल के कॉलेज में पढ़ने वाले कश्मीरी छात्रों पर कथित तौर पर युवा सेना के सदस्यों ने हमला किया था। बता दें युवा सेना शिव सेना की यूथ विंग है।
नजीर का कहना है कि उसपर तिलक रोड पर करीब 10.45 पर हमला हुआ, उस वक्त वह बाइक से घर के लिए लौट रहा था। उसे ट्रैफिक रिग्नल पर रोका गया। उसके पीछे वाली बाइक पर दो लोग सवार थे। वह उसे आवाज देते हुए वहां से हटने को बोल रहे थे, जिसके बाद उनके साथ नजीर का झगड़ा हो गया। नजीर की बाइक पर हिमाचल प्रदेश का रजिस्ट्रेशन नंबर है। इन दोनों ने उससे कहा कि वह उसे हिमाचल प्रदेश भेज देंगे।
नजीर ने दावा करते हुए कहा कि जब वह उन लोगों को कह रहा था कि वह जम्मू कश्मीर का रहने वाला है और पत्रकार है, तो दोनों ने उसके साथ मारपीट की और कहा, "हम तुम्हें वापस कश्मीर भेज देंगे, अपनी पत्रकारिता वहीं करना।"
दोनों हमलावरों ने नजीर का फोन छीन लिया और उसकी बाइक को भी नुकसान पहुंचाया। इसके बाद हमलवार वहां से भाग गए। नजीर ने उनकी बाइक का नंबर नोट कर लिया था। और पास के पुलिस स्टेशन में घटना की सूचना दी। पुलिस ने हमलावरों का पता लगाया, दोनों की उम्र 20 के करीब है, दोनों अपने माता-पिता के साथ पुलिस स्टेशन आए और नजीर से माफी मांगी। नजीर का कहना है कि उन्होंने इस मामले को आगे न बढ़ाने का फैसला लिया है और वह पुलिस शिकायत को भी वापस ले लेंगे।