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मोदी सरकार का एतिहासिक फैसलाः जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के खात्मे का संकल्प राज्यसभा में पेश

Mon, 05 Aug 2019 10:06 AM IST
Nilesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • गृह मंत्री ने की एनएसए-गृह सचिव के साथ मैराथन बैठक 
  • पर्यटकों की वापसी के बीच केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक आज
  • सत्र के तत्काल बाद कश्मीर जाएंगे अमित शाह, लेंगे जायजा
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संसद (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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विस्तार
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कश्मीर मामले में बीते दो दिनों से जारी कयासों और अफवाहों के दौर के बीच रविवार को केंद्र सरकार के स्तर पर हुई हलचल ने इसे और हवा दे दी है। पर्यटकों की वापसी और सरकारी तंत्र के लिए घजारी कई दिशा-निर्देश के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल, गृह मंत्री राजीव गावा और खुफिया विभाग के प्रमुखों के साथ मैराथन बैठक की। 

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इसी बीच आमतौर पर हर हफ्ते बुधवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक सोमवार को बुलाई गई है। सरकार की योजना इसी दिन कश्मीर आरक्षण संशोधन बिल संसद में पेश करने की है। जबकि संसद सत्र के खत्म होते ही गृह मंत्री की कश्मीर यात्रा का खाका खींचा जा रहा है।



संसद भवन में गृह मंत्री शाह ने एनएसए, गृह सचिव, आईबी और रॉ के प्रमुखों के साथ करीब तीन घंटे बैठक की। बताते हैं कि हाल ही में कश्मीर घाटी से वापस लौटा एनएसए ने शाह को वहां की स्थिति से अवगत कराया। इस दौरान कश्मीर के जल्द से जल्द पर्यटकों से खाली कराने की स्थिति और रणनीति पर भी गंभीर विमर्श हुआ। 
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सूत्रों का कहना है कि अमरनाथ यात्रा के जारी रहते ही पाकिस्तान की ओर से बड़ी संख्या में घुसपैठ कराने की कोशिश की गई। यह कोशिश लगातार जारी है। जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के कई सैनिक और आतंकवादी मारे गए हैं।  इसी के मद्देनजर अमरनाथ यात्रा को निलंबित करने और पर्यटकों को तत्काल वापस बुलाने का फैसला लिया गया है।

कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक आज, विपक्ष में हलचल

इस बीच आमतौर को हर हफ्ते आमतौर पर बुधवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक सोमवार को बुलाई गई है। कहा जा रहा है कि कैबिनेट के बैठक में पीएम अपने सहयोगियों को राज्य की स्थिति और सरकार की रणनीति की जानकारी देने के साथ कुछ अहम फैसला कर सकते हैं। चूंकि सत्र के तत्काल बाद गृह मंत्री कश्मीर जा रहे हैं, इसलिए कयास लगाया जा रहा है कि सरकार राज्य के संदर्भ में कुछ बड़े फैसले ले सकती है।

सरकार के ताबड़तोड़ निर्णय के कारण विपक्ष में हलचल है। कांग्रेस ने जहां स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। वहीं पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने रविवार शाम ही सर्वदलीय बैठक बुलाई है। पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस लगातार केंद्र सरकार पर अंधेरे में रखने का आरोप लगा रहे हैं। खासतौर से राज्यपाल के दो-तीन इंतजार करें संबंधी बयान ने राज्य में कुछ बड़ा होने संबंधी कयासों को हवा दी है।
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घाटी में फिर से फहराया जा सकता है तिरंगा

सियासी हलचल को अनुच्छेद 35 ए, अनुच्छेद 370, राज्य में परिसीमन, राज्य को तीन हिस्से में बांटने जैसे कई मुद्दों से जोड़ा जा रहा है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि इस सियासी हलचल का कश्मीर से कोई लेना देना नहीं है। सरकार वहां विधानसभा चुनाव से पहले इन मुद्दों पर हाथ नहीं डालेगी। मामला पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) सहित सीमा पार के दूसरे मामलों से जुड़ा है।

भविष्य में इसी से जुड़े मुद्दों पर सरकार कोई बड़ा फैसला कर सकती है। जहां तक घाटी में सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ाने की बात है तो यह स्वतंत्रता दिवस को ले कर है। गौरतलब है कि दशकों बाद पहली बार घाटी के गांव गांव में तिरंगा झंडा फहराए जाने की संभावना है।
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