इस बीच आमतौर को हर हफ्ते आमतौर पर बुधवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक सोमवार को बुलाई गई है। कहा जा रहा है कि कैबिनेट के बैठक में पीएम अपने सहयोगियों को राज्य की स्थिति और सरकार की रणनीति की जानकारी देने के साथ कुछ अहम फैसला कर सकते हैं। चूंकि सत्र के तत्काल बाद गृह मंत्री कश्मीर जा रहे हैं, इसलिए कयास लगाया जा रहा है कि सरकार राज्य के संदर्भ में कुछ बड़े फैसले ले सकती है।
सरकार के ताबड़तोड़ निर्णय के कारण विपक्ष में हलचल है। कांग्रेस ने जहां स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। वहीं पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने रविवार शाम ही सर्वदलीय बैठक बुलाई है। पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस लगातार केंद्र सरकार पर अंधेरे में रखने का आरोप लगा रहे हैं। खासतौर से राज्यपाल के दो-तीन इंतजार करें संबंधी बयान ने राज्य में कुछ बड़ा होने संबंधी कयासों को हवा दी है।
सियासी हलचल को अनुच्छेद 35 ए, अनुच्छेद 370, राज्य में परिसीमन, राज्य को तीन हिस्से में बांटने जैसे कई मुद्दों से जोड़ा जा रहा है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि इस सियासी हलचल का कश्मीर से कोई लेना देना नहीं है। सरकार वहां विधानसभा चुनाव से पहले इन मुद्दों पर हाथ नहीं डालेगी। मामला पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) सहित सीमा पार के दूसरे मामलों से जुड़ा है।
भविष्य में इसी से जुड़े मुद्दों पर सरकार कोई बड़ा फैसला कर सकती है। जहां तक घाटी में सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ाने की बात है तो यह स्वतंत्रता दिवस को ले कर है। गौरतलब है कि दशकों बाद पहली बार घाटी के गांव गांव में तिरंगा झंडा फहराए जाने की संभावना है।