भारतीय जनता पार्टी परंपरागत रूप से इसराइल के साथ नजदीकी सुरक्षा संबंध बनाने के लिए उत्साही रहती है। 14 जून 2000 में तत्कालीन गृह मंत्री लाल कृष्ण आडवाणी ने इसराइल का दौरा किया था, उस समय वे अपने साथ तमाम भारतीय सुरक्षा प्रमुखों को लेकर गए थे। यह एक अभूतपूर्व कदम था। आडवाणी की यात्रा के बाद रूस के आंतरिक मामलों के मंत्री व्लादिमिर रशैलो भी भारत आए।
'कश्मीर में इसराइली नीति'
साल 2014 से ही बीजेपी भारत प्रशासित कश्मीर में वही नीति अपना रही है जो इसराइल ने फलिस्तीन में मौजूद आजादी के समर्थकों के खिलाफ अपनाई थी। 14 मई 2017 को राम माधव ने टीवी चैनल एनडीटीवी में कहा था कि वे जम्मू-कश्मीर में मौजूद हर एक चरमपंथी का खात्मा कर देंगे। उन्होंने इसराइल की तरह ही सीमा पर दंडात्मक हमलों की बात भी कही थी। हालांकि इन तमाम कोशिशों के बाद भी घाटी के हालात सामान्य होते नजर नहीं आते। पत्थरबाजों के साथ चरमपंथियों जैसा सलूक करने की नीति उलटी पड़ रही है। यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी भारतीय सेना की आलोचना हुई है, जिसमें कहा गया है कि पैलेट गन के इस्तेमाल से भारत अपने ही नागरिकों को अंधा बना रहा है।
पिछले साल जुलाई में बुरहान वानी की मौत के बाद से ही भारतीय सुरक्षा बलों पर हमले तेज हुए हैं। साल 2016 तक माओवादियों के साथ मुठभेड़ में सुरक्षाबलों की मौत के आंकड़े अधिक होते थे लेकिन 2016 के बाद से जम्मू-कश्मीर में यह आंकड़ा माओवादी इलाकों से ज्यादा बड़ा हो गया है।
आम जनता का चरमपंथियों को समर्थन
हालात तब और खराब होते नजर आते हैं जब आम जनता भी विद्रोह में शामिल हो जाती है। बुरहान वानी की मौत के बाद बड़ी संख्या में आम लोग उनके जनाजे में शामिल होने सड़कों पर उतर आए थे, लोगों ने भारतीय सेना के खिलाफ प्रदर्शन भी किया।
हाल ही में 8 जनवरी 2018 को बडगाम जिले में तीन चरमपंथियों की मौत के बाद आम लोगों ने प्रदर्शन किया। चरमपंथियों के लिए आम लोगों के भीतर इस तरह का समर्थन किसी अन्य चरमपंथ से ग्रसित देश में नहीं दिखता, चाहे वे अफगानिस्तान, सीरिया या इराक ही क्यों न हों। इस तरह के हालात सिर्फ इसराइली सीमाओं पर ही देखने को मिलते हैं जहां प्रत्येक फलीस्तीनी इसराइली कब्जे का विरोध करता है।
कुछ इसी तरह की नीति राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भी अपना रही हैं, जिन्होंने 28 जुलाई 2017 को कहा था कि जल्द ही घाटी के युवाओं के भीतर सेना या पुलिस के प्रति डर नहीं रहेगा। बीजेपी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा के नेतृत्व में कश्मीर मसले पर कुछ लोगों के समूह ने भी यह बात उठाई थी कि कश्मीरी लोगों के बीच दिन प्रतिदिन निराशा और हताशा की भावना बढ़ती जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा था कि वे सरकार के इस रवैए के भी खिलाफ हैं, जिसमें सभी प्रदर्शनकारियों को पाकिस्तान की कठपुतली बताया जा रहा है। यहां तक कि बीजेपी के साथ गठबंधन करने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी हाल ही में 8 जनवरी 2018 को श्रीनगर में कहा था कि बातचीत से ही कश्मीर समस्या का समाधान निकाला जा सकता है। इसलिए इसराइली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू की इस यात्रा से यह उम्मीदें लगाना बेमानी ही होगा कि उनके साथ सुरक्षा संबंधों पर बहुत अधिक चर्चा हो, वो भी तब जबकि सरकार ने कश्मीर समस्या के समाधान के लिए पूर्व आईबी प्रमुख दिनेश्वर शर्मा को नियुक्त कर लिया है।