कश्मीर में सैन्य कार्रवाई में मारे जाने वाले शीर्ष स्थानीय आतंकियों के जनाजे पर रोक लगाने की व्यापक योजना तैयार की जा रही है। इस योजना के लागू हो जाने पर सुरक्षा एजेंसियां कुख्यात आतंकियों के शव उसके घरवालों को नहीं सौंप उसे खुद दफन कर देगी।
इसी योजना के तहत मारे गए नए आतंकियों की शव यात्रा में भड़काऊ भाषण देने वालों और आतंकवाद के पक्ष में एके-47 चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का फैसला ले लिया गया है। इन शव यात्रा में एक निश्चित संख्या से अधिक भीड़ को रोकने के उपायों पर भी काम चल रहा है।
गौरतलब है कि सीजफायर से पहले स्थानीय आतंकियों की शव यात्रा में शामिल होने वाले करीब 125 लड़केआतंकवाद के महिमामंडल और उसकेमाहौल से प्रभावित हो कर बंदूक उठा चुकेहैं। सुरक्षा एजेसियों के उच्चपदस्थ सूत्रों ने बताया कि यह स्थिति कोई संयोग नहीं बल्कि पूरी योजना के तहत की गई करतूतों का नतीजा है। सूत्रों के मुताबिक इन घटनाओं में स्थानीय लोगों की संलिप्तता के चलते इसपर सख्ती की योजना के खिलाफ जबरदस्त राजनीतिक हस्तक्षेप हुआ था। लेकिन अब राज्यपाल शासन लागू होने केबाद इसे अमल में लाने का फैसला लिया गया है।
सूत्रों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस को यह निर्देश दिया गया है कि शव यात्रा के दौरान आतंकवादी को शहीद बताने वालों और भड़काऊ भाषण से युवकों को आकर्षित करने वालों की पहचान कर उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।