अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने कहा कि पाकिस्तान में सभी लोग भारत लोग भारत विरोधी नहीं हैं। यहां तक कि नवाज शरीफ भी भारत से शांति और सौहार्द चाहते हैं। इसलिए क्षेत्रीय शांति, स्थायित्व और विकास के लिए जरूरी है कि भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान मिलकर काम करें। करजई ने अफगानिस्तान में रूस और चीन के प्रयास की भी तारीफ की।
इस्टीट्यूट ऑफ पीस एंड कांफ्लिक्ट स्टडीज(आईपीसीएस) के आमंत्रण पर भारत आए पूर्व राष्ट्रपति ने रीजनल पॉवर प्ले एंड राइज ऑफ रेडिकलिज्म इन अफगानिस्तान विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि सोवियत संघ को उनके देश से भगाने के लिए पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की मदद की थी। इसके लिए रीलीजियस रेडिकलिज्म, वॉयलेंस का सहारा लिया था। पड़ोसी देश ने अमेरिका के साथ अफगानिस्तान के लोगों को प्रशिक्षित करने, हथियार देने समेत सभी दरवाजे खोले थे। सोवियत संघ के जाने बाद भी यह जारी रहा और इसका खामियाजा हमारे लोग आज भी भुगत रहे हैं। वहां रीलीजियस रेडिकलिज्म, हिंसा काफी बढ़ गई है।
करजई ने कहा कि अब वह समय आ गया है जब इस पर नये सिरे से विचार करने की जरूरत है। पड़ोसी देश को इस पर पुनर्विचार करके, पुनर्योजना बनाकर, इसे प्रभावी रूप से पुन: लागू कराने के बारे में सोचना चाहिए। एक ऐसे उद्देश्य को बढ़ावा देना चाहिए जो क्षेत्र और अफगानिस्तान की उम्मीदों, सृद्धि, शांति, स्थायित्व और विकास को बढ़ाने में सहयोग दे। करजई ने कहा कि अब वह दौर नहीं है और अब आप धार्मिक रेडिकलिज्म को बढ़ावा नहीं दे सकते। उन्होंने कहा कि यदि कोई सोचता है कि हम इसे खत्म कर देंगे, तो यह अच्छा नहीं कहा जाएगा।
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि क्षेत्र में शांति के लिए जरूरी है कि विकास की दृष्टि से क्षेत्रीय पॉवर प्लेयर सोचें, एक दूसरे देश का सहयोग करें और आगे बढ़ें। इस क्रम में उन्होंने भारत से अफगानिस्तान को मिल रहे सहयोग की जमकर तारीफ की। शिक्षा, प्रशिक्षण, तकनीक, उपकरण और अफगानिस्तान के निर्माण में भारत के पहल का स्वागत किया और आभार व्यक्त किया। करजई ने कहा कि रूस अफगानिस्तान से चला गया लेकिन अब भी वह अफगानिस्तान के निर्माण में अपनी मदद दे रहा है। उसका सहयोग इस समय अमेरिका से भी ज्यादा है।