खासतौर पर, कश्मीर में तैनात जवानों की पत्नियां करवा चौथ वाले दिन वीडियो कॉल के जरिए अपने 'चांद' का दीदार नहीं कर सकेंगी। वजह, कश्मीर में इंटरनेट बंद है। वीडियो कॉल तो होगी नहीं। रही बात व्हाट्सएप पर फोटो भेजने की तो वह भी संभव नहीं। यह व्यथा उन पत्नियों के साथ भी है, जो कश्मीर में तैनात हैं, मगर उनके पति किसी दूसरी जगह पर तैनात हैं। सोशल मीडिया के दूसरे साधन जैसे इंस्टाग्राम और फेसबुक भी बिना इंटरनेट नहीं चलेंगे। दो दिन पहले ही मोबाइल कॉल शुरु हुई है, लेकिन वह भी ऐसी है कि कई बार फोन मिलाना पड़ता है। लाइनें व्यस्त हैं, कुछ देर बाद कॉल करें, ये संदेश सुनाई पड़ता है। बात करने के दौरान फोन कट जाता है।
कश्मीर में सेना, सीआरपीएफ और दूसरे अर्धसैनिक बलों को मिलाकर तीन लाख से अधिक जवान मुख्य ड्यूटी पर तैनात हैं। अनुच्छेद 370 हटाए जाने की वजह से कश्मीर घाटी में मोबाइल सेवा, लैंड लाइन फोन और इंटरनेट, इन सब सेवाओं को बंद कर दिया गया था। जवानों को अपने घरों पर भी फोन करने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। एक यूनिट पर सेटेलाइट या बीएसएनएल का एक फोन उपलब्ध कराया गया था। सभी जवानों को घंटों इंतजार करने के बाद अपनों से बात करने का मौका मिलता था।
अब गत सोमवार से लैंड लाइन एवं बीएसएनएल मोबाइल फोन सेवा चालू की गई थी। हालांकि इंटरनेट अभी तक बंद है। कुछ घटनाएं होने के कारण फोन की एसएमएस सेवा भी रोक दी गई है। श्रीनगर में तैनात सीआरपीएफ के एक अधिकारी का कहना है कि यह बात सही है कि करवा चौथ पर जवानों को अपनी पत्नियों के साथ वीडियो कॉल या सोशल मीडिया के जरिए बात करने का अवसर नहीं मिलेगा। हालांकि जवान मोबाइल फोन या लैंड लाइन फोन से अपने घर बात कर सकते हैं। पाकिस्तान की सीमा से सटे बॉर्डर पर सीमा सुरक्षा बल की महिला जवानों ने अपने पतियों की सलामती के लिए करवा चौथ का व्रत रखा। इन महिला जवानों का कहना था कि उन्होंने अपने पति की लम्बी उम्र के साथ ही भारत मां की सुरक्षा की कामना की है।
सोशल मीडिया के कई प्लेटफार्म पर करवा चौथ की शुभकामनाएं देने के लिए नई ईमोजी और स्टीकर बनाए गए हैं। महिलाएं करवा चौथ के दिन बिना खाए पिये निर्जला व्रत रहकर शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद अपने पति के हाथों से पानी पीकर ही अपना व्रत खोलती हैं। देखा गया है कि जिनके पति दूर होते हैं, वे महिलायें वीडियो कॉल कर या अपने पति से फोन पर बात कर व्रत खोल लेती हैं। फोटो का आदान प्रदान भी होता है। कश्मीर में तैनात पुरुष जवानों और महिलाओं को इस बार वीडियो कॉल करने का अवसर नहीं मिलेगा।