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Karur Stampede: टीवीके की याचिका पर 'सुप्रीम' फैसला सुरक्षित, हाईकोर्ट के SIT गठन वाले आदेश को दी गई थी चुनौती

Fri, 10 Oct 2025 03:56 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तमिल अभिनेता विजय की राजनीतिक पार्टी टीवीके और अन्य द्वारा दायर याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। इस भगदड़ में 41 लोगों की मौत हुई थी। याचिका में मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें करूर भगदड़ की जांच के लिए एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया गया था।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तमिल अभिनेता विजय की राजनीतिक पार्टी टीवीके और अन्य द्वारा दायर याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। सुप्रीम कोर्ट ने करूर भगदड़ की जांच के लिए एसआईटी गठित करने के मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली तमिल अभिनेता विजय के राजनीतिक दल तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया। इस भगदड़ में 41 लोग मारे गए थे।

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जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा, हम समझ नहीं पा रहे हैं कि यह आदेश कैसे पारित हुआ? जब मदुरै की खंडपीठ इस मामले पर विचार कर रही थी, तो चेन्नई की एकल पीठ ने इस मामले को कैसे आगे बढ़ाया? जस्टिस माहेश्वरी ने कहा, एक जज के रूप में मेरे 15 वर्षों से अधिक के अनुभव में यदि खंडपीठ किसी मामले में संज्ञान लेती है तो एकल पीठ अपने आप पीछे हट जाती है। 

सुनवाई की शुरुआत में तमिल अभिनेता विजय की राजनीतिक पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम ने दलील दी कि हाईकोर्ट में याचिका सिर्फ राजनीतिक रैलियों के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने के लिए दायर की गई थी। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने पहले ही दिन एसआईटी का गठन किया था और अदालत ने पार्टी और विजय को सुने बिना ही उनके खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी कर दी। 
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टीवीके की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सीए सुंदरम ने भी दलील दी कि हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मामले की सुनवाई के लिए एक विशेष पीठ को अधिकृत कर सकते हैं, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ है। राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि एसआईटी का गठन हाईकोर्ट ने ही किया था और राज्य ने कोई नाम नहीं दिया। अधिकारी अपनी ईमानदारी और स्वतंत्रता के लिए जाने जाते हैं, और इसमें संदेह का कोई कारण नहीं है। पीठ ने पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

घटना का सीबीआई जांच की मांग
इससे पहले मंगलवार को, सीजेआई की पीठ ने 27 सितंबर की भगदड़ की सीबीआई जांच से इन्कार करने वाले हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली भाजपा नेता उमा आनंदन की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की थी। तमिलनाडु के भाजपा नेता जीएस मणि ने भी भगदड़ की सीबीआई जांच की मांग करते हुए एक याचिका दायर की है। टीवीके ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए तर्क दिया है कि यदि सिर्फ तमिलनाडु पुलिस के अधिकारियों की ओर से निष्पक्ष जांच की जाए तो यह संभव नहीं होगा।

पुलिस ने विजय पर लगाए थे कई आरोप
याचिका में हाईकोर्ट की ओर से सिर्फ तमिलनाडु पुलिस के अधिकारियों के साथ एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने पर आपत्ति जताई गई है। इसमें कुछ उपद्रवियों की ओर से पूर्व नियोजित साजिश की संभावना का आरोप लगाया गया है जिसके कारण भगदड़ मची। याचिका में पार्टी और अभिनेता-राजनेता के खिलाफ हाईकोर्ट की इस तीखी टिप्पणी पर भी आपत्ति जताई गई कि घटना के बाद वे वहां से चले गए और उन्होंने कोई खेद व्यक्त नहीं किया। इससे पहले, पुलिस ने कहा था कि रैली में 27,000 लोग शामिल हुए, जो अपेक्षित 10,000 प्रतिभागियों से लगभग तीन गुना अधिक था, तथा इस त्रासदी के लिए विजय की ओर से कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने में सात घंटे की देरी को जिम्मेदार ठहराया गया।

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