तमिलनाडु के करूर में 27 सितंबर को हुई भगदड़ के मामले में टीवीके के तीन नेताओं पर एफआईआर दर्ज की गई है, जिनमें जिला सचिव भी शामिल हैं। टीवीके के वकील ने दावा किया किकानूनी रूप से जनसभा की अनुमति ली गई थी, लेकिन पुलिस ने पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी। कोर्ट ने सभी आरोपियों को 14 अक्तूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजते हुए कहा कि आगे की कार्रवाई कानून के तहत होगी।
तमिलनाडु के करूर में 27 सितंबर को मची भगदड़ के मामले में तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) के नेताओं और और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है। इस बीच, टीवीके के वकील मणिकंडन ने बताया कि इस मामले में तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिनमें करूर जिला सचिव और दो अन्य शामिल हैं। उन्होंने बताया कि पार्टी की ओर से कोर्ट में यह दलील दी गई है कि जनसभा के लिए कानूनी रूप से अनुमति मांगी गई थी और कार्यक्रम भी नियमों के अनुसार ही आयोजित किया गया था।
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उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने जनसभा के लिए पर्याप्त सुरक्षा बल नहीं दिया। मणिकंडन ने कहा, हमने दस हजार लोगों के लिए लिखित सूचना दी थी। पुलिस की सलाह पर एक जनसभा पहले ही रद्द कर दी गई थी। अगर उन्हें भीड़ बढ़ने की आशंका थी, तो वह हमें पहले ही सूचित कर सकते थे।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने आरोपियों को जमानत अर्जी दायर करने की अनुमति भी दी है। फिलहाल उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
करूर भगदड़ मामले में टीवीके के करूर पश्चिम जिला सचिव मथियाझगन और एक अन्य कार्यकर्ता को भी गिरफ्तार किया गया है। इन पर पार्टी प्रमुख विजय के प्रचार के लिए झंडे और फ्लेक्स बैनर लगाने की जिम्मेदारी थी। पुलिस ने मेडिकल जांच के बाद पोनराज और मथियाझगन को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें 14 अक्तूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।