केंद्रीय सचिवालय सेवा (सीएसएस) के अधिकारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर नए 'कर्तव्य भवन-3' की आंतरिक संरचना पर गंभीर आपत्ति जताई है। अधिकारियों का कहना है कि इस भवन की ओपन लेआउट व्यवस्था न केवल गोपनीयता को नुकसान पहुंचा रही है बल्कि विश्लेषणात्मक कार्य की दक्षता को भी प्रभावित कर रही है। यह भवन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बुधवार को उद्घाटित किया गया, जो कि 10 नए केंद्रीय सचिवालय भवनों की श्रृंखला में पहला है।
सीएसएस फोरम ने अपने पत्र में कहा है कि एक ही कार्यस्थल पर कई विभागों और अनुभागों को बिना किसी स्पष्ट सीमांकन के बैठाना गोपनीयता के लिए खतरा है। असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसरों के लिए न तो अलग से स्टोरेज स्पेस है और न ही काम के दौरान फोकस बनाए रखने के लिए पर्याप्त अलगाव। निचली ऊंचाई की अलमारी लगाकर सेक्शन ऑफिसर और अंडर सेक्रेटरी के लिए बनाए गए स्थान गोपनीयता के मानकों पर खरे नहीं उतरते।
संवेदनशील मामलों पर हो सकता है असर
फोरम का कहना है कि ओपन स्पेस में अधिकारी जब वरिष्ठ अधिकारियों से टेलीफोन या आमने-सामने बात करते हैं, तो बाकी कर्मचारी बातचीत सुन सकते हैं। इससे संवेदनशील मामलों की समय से पहले जानकारी लीक होने का खतरा बढ़ जाता है। पहले अंडर सेक्रेटरी को अलग कमरा मिलता था जिससे गोपनीयता बनी रहती थी, लेकिन अब वह व्यवस्था नहीं है।
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कर्तव्य भवन-3 में ये मंत्रालय होंगे शामिल
प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटित किए गए कर्तव्य भवन-3 में गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, ग्रामीण विकास, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई), पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय, और प्रधानमंत्री के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार का कार्यालय शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य विभिन्न मंत्रालयों को एक ही छत के नीचे लाकर कामकाज की गति और समन्वय बढ़ाना है।
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सीएसएस फोरम ने की सुधार की मांग
सीएसएस फोरम ने आग्रह किया है कि कार्यस्थल की डिजाइन दोबारा समीक्षा की जाए ताकि गोपनीयता, कार्यकुशलता और मानसिक एकाग्रता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि इस तरह की ओपन ऑफिस व्यवस्था विश्लेषणात्मक और संवेदनशील कार्य के लिए उपयुक्त नहीं है, और इससे अधिकारियों की कार्यक्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।