यादगीर में सामाजिक बहिष्कार से परेशान 46 वर्षीय महिला ने भीमा नदी में कूदकर जान दे दी। पंचायत ने बेटे पर लगे आरोप के बाद परिवार पर 10 साल का प्रतिबंध लगाया था। इस बीच जब महिला को गांव लौटी तो फिर उसे प्रताड़ित किया गया और सहारा देने वालों को भी धमकाया गया। मामले में पुलिस ने पांच लोगों पर केस दर्ज किया है।
कर्नाटक के यादगीर जिले में एक 46 साल की एक महिला ने कथित तौर पर अपने ही समाज के लोगों के बहिष्कार और लगातार मिल रही प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
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मृतक महिला की पहचान कमलम्मा के रूप में हुई है, जो यादगीर के गिरिनगर इलाके की रहने वाली थी। महिला के पति यल्लप्पा सूर्यवंशी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। यल्लप्पा ने बताया कि उनके बेटे पर लगे एक बिना साबित हुए आरोप की वजह से समाज के कुछ लोगों ने उनके परिवार का बहिष्कार कर दिया था।
शिकायत के मुताबिक, आठ सितंबर 2025 को एक पंचायत बुलाई गई थी। इस पंचायत ने परिवार पर 10 साल का सामाजिक बहिष्कार लगा दिया और उन्हें गांव छोड़ने का हुक्म दिया। इस कड़े फैसले के बाद परिवार यादगीर शहर में एक किराए के मकान में रहने लगा था।
हालांकि, इस महीने की शुरुआत में, जब महिला अपने पैतृक इलाके में वापस लौटी, तो कुछ लोगों के एक समूह ने कथित तौर पर उसे रोका और उन्होंने बहिष्कार की बात दोहराई और उसे वहां रहने से मना कर दिया। यल्लप्पा का आरोप है कि जिन रिश्तेदारों ने कमलम्मा को सहारा देने की कोशिश की, उन्हें भी समाज से बाहर निकालने की धमकी दी गई।
इस मानसिक दबाव और अपमान को कमलम्मा सहन नहीं कर पाई। उसने 14 मार्च की शाम और 15 मार्च की सुबह के बीच जोलाददगी गांव के पास भीमा नदी में कूदकर अपनी जान दे दी। पुलिस ने 15 मार्च को नदी से महिला का शव बरामद किया और उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा।
पुलिस ने यल्लप्पा की शिकायत पर पांच लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है ताकि दोषियों को सजा मिल सके।