बिहार के समस्तीपुर के रहने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर की आत्महत्या के मामले में मंगलवार को उसकी पत्नी और उसके परिजनों के खिलाफ खुदकुशी के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने बताया कि बंगलूरू की एक निजी कंपनी में काम करने वाले अतुल सुभाष ने 24 पन्नों का सुसाइड नोट छोड़ा है, जिसमें उसने शादी के बाद जारी तनाव, उसके खिलाफ दर्ज कई मामलों, उसकी पत्नी, रिश्तेदार और उत्तर प्रदेश के एक न्यायाधीश की ओर से प्रताड़ित किए जाने का जिक्र किया है।
पुरुष अधिकार कार्यकर्ता बरखा त्रेहन ने कहा कि अतुल सुभाष पहले व्यक्ति नहीं हैं, ऐसे लाखों पुरुष मर चुके हैं। 34 वर्षीय अतुल सुभाष मजबूर थे, सिस्टम फेल हो चुका है। सिस्टम में बहुत पक्षपात है, सिर्फ महिलाओं की बात सुनी जाती है, पुरुषों की नहीं... पुरुषों को प्रताड़ित किया जाता है और धमकाया जाता है... (आईपीसी) धारा 498 के तहत जानबूझकर पुरुषों के खिलाफ मामले दर्ज किए जाते हैं और सुप्रीम कोर्ट ने पाया है कि इनमें से 95% मामले फर्जी हैं। महिला सुरक्षा के लिए बनाए गए कानूनों का हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
इस बीच मामले ने पूरे देश में हलचल मचा दी है। मामले में वकील आभा सिंह ने कहा कि बंगलूरू में 34 वर्षीय युवा तकनीकी विशेषज्ञ अतुल सुभाष ने आत्महत्या कर ली और उन्होंने एक सुसाइड नोट छोड़ा। उन्होंने बताया कि उनके खिलाफ 9 पुलिस शिकायतें दर्ज की गई हैं, हत्या, दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा के झूठे आरोप हैं। सुसाइड नोट में कहा गया है कि यह सच नहीं था और वह व्यक्ति अपनी पत्नी को 2 लाख रुपये दे रहा था और इसके बावजूद वह उसे अपने बेटे से मिलने नहीं दे रही थी और उसके बेटे को ब्लैकमेल करने के लिए एक जरिए के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। उसके और उसके रिश्तेदारों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया जाना चाहिए। उसके खिलाफ झूठे मामले दर्ज करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। यह कानून का घोर दुरुपयोग है। दहेज कानूनों का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
क्या है मामला?
पुलिस के मुताबिक, सुभाष का शव बंगलूरू के मंजूनाथ लेआउट क्षेत्र में स्थित उनके आवास पर फंदे से लटका मिला। उनके कमरे में एक तख्ती भी लटकी मिली जिसमें लिखा था- न्याय मिलना बाकी है। अतुल सुभाष ने आत्महत्या करने से पहले डेढ़ घंटे का एक वीडियो बनाया, जिसमें उन्होंने उन सभी परिस्थितियों का जिक्र किया, जिसके कारण उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
'न्याय न मिलने तक अस्थियों का विसर्जन न करें'
सुभाष ने मांग की कि उनकी मौत के बाद पत्नी और उसके परिवार को उनके शव के पास जाने की अनुमति न दी जाए। उन्होंने वीडियो में अपने परिजनों से कहा कि जब तक उनका कथित उत्पीड़न करने वालों को सजा नहीं मिल जाती तब तक वे उनकी अस्थियों का विसर्जन न करें। सुभाष ने न्याय की मांग करते हुए अपने परिजनों से आग्रह किया कि यदि उसका उत्पीड़न करने वालों को दोषी नहीं ठहराया जाता है तो वे उसकी अस्थियों को अदालत के नाले के बाहर फेंक दें।
सुसाइड नोट में क्या?
सुभाष ने सुसाइड नोट में बताया कि 2019 में उसने शादी की थी और अगले साल उसका एक बेटा हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी के परिजन उन्हें बार-बार रुपयों के लिए परेशान करते थे और लाखों रुपये मांगते थे और जब उन्होंने रुपये देने से इनकार कर दिया तो उनकी पत्नी कथित तौर पर 2021 में बेटे के साथ घर छोड़कर चली गई।
अब तक जांच में क्या पता चला?
पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच से पता चला है कि सुभाष का अपनी पत्नी के साथ वैवाहिक कलह था और उसकी पत्नी ने सुभाष के खिलाफ उत्तर प्रदेश में मामला दर्ज कराया था। सुभाष ने अपना सुसाइड नोट कई लोगों को ईमेल के जरिए भेजा तथा उसे एक व्हॉट्सऐप समूह पर भी साझा किया था, जिससे वह जुड़ा हुआ था।