कर्नाटक के बीदर में कोर्ट ने शुक्रवार को शाहीन प्राइमरी और हाई स्कूल की संचालिका फरीदा बेगम और एक छात्र की मां नजबुन्निसा को जमानत दे दी। दोनों महिलाओं पर आरोप था कि इन्होंने विद्यालय में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनपीआर) के खिलाफ विद्यालय में एक नाटक आयोजित किया था, जिसके बाद इन्हें राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। 30 जनवरी को गिरफ्तारी के बाद से वे हिरासत में थी।
जिला प्रमुख और सत्र न्यायाधीश ने नजबुन्निसा और फरीदा बेगम को जमानत दे दी। इन्हें एक लाख रुपए के व्यक्तिगत बांड पर जमानत दी गई। उन्हें जांच में सहयोग करने और जांच अधिकारी के सामने पेश होने के लिए भी कहा गया है।
नजबुन्निसा उस बच्ची की मां हैं, जिसने कथित तौर पर विद्यालय में 21 जनवरी को आयोजित सीएए विरोधी एक नाटक में पीएम मोदी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। बच्ची छठी कक्षा में पढ़ती है। वहीं, फरीदा बानो विद्यालय की संचालिका है।
न्यायाधीश ने 11 फरवरी को जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए , मामले को 14 फरवरी तक सुरक्षित कर लिया था। इसके बाद आज कोर्ट ने दोनों महिलाओं को जमानत दे दी।
गौरतलब है कि शाहीन प्राइमरी और हाई स्कूल के छात्रों ने पिछले महीने सीएए और एनआरसी के विरोध में एक नाटक का मंचन किया था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। इसके बाद नीलेश रक्शा नाम के एक व्यक्ति की शिकायत के आधार पर स्कूल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई थी।
एफआईआर के आधार पर स्कूल की संचालिका के साथ ही एक बच्चे की माता को गिरफ्तार किया गया था। जबकि, पुलिस इस पर भी नहीं रुकी और बच्चों से पूछताछ करने के लिए स्कूल परिसर के भीतर चली गई।