‘ऑपरेशन कमल’ 2008 में सरकार बनने के छह महीने बाद शुरू हुआ। तब कांग्रेस और जद (एस) के 7 विधायकों ने विधानसभा से इस्तीफा दिया। एक अन्य जद (एस) विधायक की मृत्यु हो गई। फरवरी, 2009 में हुए उपचुनाव में इस्तीफा देने वाले विधायक भाजपा के टिकट पर लड़े। आठ में पांच सीटें जीतकर विधानसभा में भाजपा विधायकों की संख्या 115 हो गई।
चार लोगों की थी बहुमत दिलाने में मदद
भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलने में सबसे बड़ा हाथ चार लोगों का था। इनमें बेल्लारी के तीन रेड्डी बंधुओं करुणाकर, सोमशेखर और जनार्दन और उनके करीबी बी. श्रीरामुलु शामिल थे। सभी ने बेल्लारी और आसपास की सीटों से चुनाव लड़ा था। इनमें जनार्दन, करुणाकर और श्रीरामुलु येदियुरप्पा सरकार में मंत्री बने। सोमशेखर को राज्य दुग्ध आयोग का अध्यक्ष बनाकर मंत्री पद का दर्जा दिया गया।
ऑपरेशन कमल-2
इस बार अगर भाजपा बहुमत से दूर रह जाती है तो ऑपरेशन कमल शुरू होगा। इस बार रेड्डी बंधु और श्रीरामुलु भाजपा में ही हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि उन्होंने अभी से कांग्रेस और जद (एस) के उन जीतने वाले उम्मीदवारों की पहचान कर ली है, जो भाजपा को बहुमत दिलाने के लिए विधानसभा से इस्तीफा दे सकते हैं। इससे बहुमत प्राप्त करने की संख्या घट जाएगी।
बहुमत का महारत
पिछले साल हुए 40 सदस्यीय गोवा विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 12 सीटें जीती थीं। कांग्रेस ने 18 सीट पर जीत दर्ज की थी, लेकिन अन्य दलों ने भाजपा का समर्थन कर उसकी सरकार बनवाई। मणिपुर में 60 में कांग्रेस को 28 और भाजपा को 21 सीटें मिली थीं, लेकिन सरकार भाजपा की बनी। मेघालय में सबसे ज्यादा 21 सीटें कांग्रेस को मिलीं, लेकिन सरकार बनी भाजपा के दो विधायकों के समर्थन से नेशनल पीपुल्स पार्टी के कॉनराड संगमा की।