इशहाक ने कहा, "मैं केवल 15 दिन ही स्कूल गया था। घर में आर्थिक तंगी के चलते हालत बेहद खराब थे, इसलिए काम के लिए बचपन में ही घर छोड़ दिया। मुझे कुछ घरों में काम करने का मौका मिला, जहां मैंने पढ़ना-लिखना सीखा और किताबों को लेकर मेरा शौक विकसित हुआ। इशहाक ने बताया कि बाद में उन्होंने एक झोपड़ी में लाइब्रेरी बनाई, जिससे लोगों और खासकर बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित हो सके।"
उन्होंने कहा कि लाइब्रेरी में श्रीमद्भगवद्गीता, रामायणा, कुरान और बाइबल जैसी धार्मिक ग्रंथ थे। इसके साथ ही कन्नड़ साहित्य की ढेरों किताबें रखीं थीं ताकि पाठक अपनी पसंद की किताबें भी पढ़ सकें।
अब तक 13 लाख रुपये जुटाए...
सोशल मीडिया पर जब लोगों को लाइब्रेरी में आग और इशहाक की कहानी पता चली, तो लोग मदद के लिए आगे आए। अब तक इशहाक की मदद के लिए 13 लाख से ज्यादा रुपये जुटाए जा चुके हैं ताकि वे दोबारा लाइब्रेरी बना सकें।