बेंगलुरु सिटी रेलवे स्टेशन पर कुलियों के विश्राम कक्ष को कुछ लोगों ने नमाज अदा करने के स्थल के रूप में बदल दिया था। अब उसे फिर से कुलियों के लिए विश्राम कक्ष के रूप बदल दिया गया है। रेलवे के एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।
दरअसल, सोशल मीडिया पर इसका एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें दावा किया गया था कि क्रांतिवीर सांगोली रयन्ना बेंगलुरु सिटी रेलवे स्टेशन के अंदर एक मस्जिद बनी हुई है। इस वीडियो के सामने आने के बाद इस मुद्दे पर खासा विवाद हुआ था।
हिंदूवादी संगठन ने इसके खिलाफ सोमवार को किया था विरोध-प्रदर्शन
एक हिंदूवादी संगठन ने इसके खिलाफ सोमवार को रेलवे स्टेशन पर प्रदर्शन किया था और कुलियों के लिए बनाए गए विश्राम कक्ष को उसी उद्देश्य के लिए उपयोग किए जाने की मांग की थी। उन्होंने कक्ष में नमाज पढ़ने की अनुमति देने पर भी सवाल उठाए।
कर्नाटक के उड्प्पी स्थित कॉलेज में कुछ लड़कियों के हिजाब पहनकर आने का मामला अभी शांत नहीं हुआ है। इस बीच राज्य के कुंडापुर स्थित एक अन्य कॉलेज में हिजाब के बाद भगवा शॉल के मामले ने तूल पकड़ लिया। जानकारी के मुताबिक, बुधवार को कुुंडापुर में कुछ लड़कियां हिजाब पहनकर कॉलेज पहुंची तो उसके विरोध में करीब 100 छात्र भगवा शॉल पहनकर पहुंच गए।
इस मामले की गंभीरता को समझते हुए विधायक हालदे श्रीनिवास शेट्टी ने कॉलेज प्रशासन और छात्रों के परिजनों के साथ मीटिंग की। इस दौरान बैठक में सहमति नहीं बन पाई, क्योंकि माता-पिता हिजाब पहनने के अधिकार पर जोर दे रहे थे। वहीं अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि छात्रों को एकसमान नियम का पालन करना चाहिए। फिलहाल, इस मामले ने हिजाब विवाद को और गर्मा दिया है।
क्लासरूम में हिजाब पहनने पर रोक, हाईकोर्ट पहुंचा मामला
उधर, उडप्पी के कॉलेज में हिजाब पहनने पर प्रतिबंध को लेकर लड़कियां कर्नाटक हाईकोर्ट पहुंच गई हैं। कोर्ट में दायर याचिका में कहा कि हिजाब पहनना उनका मूल अधिकार है। इस प्रतिबंध से संविधान के अनुच्छेद 14 और 25 का हनन हो रहा है।
कर्नाटक के उडुपी जिले स्थित एक सरकारी महिला कॉलेज की छात्रा ने कर्नाटक हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की है। इसके तहत छात्रा ने क्लासरूम में भी हिजाब पहनने का अधिकार दिए जाने का अनुरोध किया है।
छात्रा रेशम फारूक की ओर से रिट उसके भाई मुबारक फारूक ने की है। याचिकाकर्ता ने कहा कि छात्राओं को हिजाब पहनने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 14 और 25 के तहत दिया गया मौलिक अधिकार है। इसके अलावा इस्लाम के तहत यह एक आवश्यक प्रथा है। लेकिन कॉलेज प्रशासन ने लड़कियों के हिजाब पहनकर क्लासरूम में बैठने पर रोक लगा दी। इस मामले में पहली सुनवाई इस सप्ताह के अंत में होनी है।
वहीं, प्रशासन का कहना है कि लड़कियां कॉलेज कैंपस में तो हिजाब पहन सकती हैं, लेकिन क्लासरूम में नहीं। वहीं, लड़कियों का कहना है कि वे हिजाब बिना पढ़ेंगी ही नहीं। छह छात्राओं ने दिसंबर से क्लास का बहिष्कार किया था। इसके बाद वह बीते सोमवार को कॉलेज पहुंची थीं। प्रशासन ने छात्राओं पर आरोप लगाते हुए कहा कि छात्राएं कॉलेज तो आती हैं लेकिन क्लास में नहीं बैठतीं। कॉलेज में 75 फीसदी दूसरे मुस्लिम छात्र-छात्राएं भी हैं, जो कि बिना किसी विरोध के उपस्थित होते हैं।