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बोल्ट से भी तेज दौड़ा कर्नाटक का गौड़ा, बफेलो रेस में तोड़ा 'रिकॉर्ड'

Fri, 14 Feb 2020 10:03 PM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंगलूरू

सार

कर्नाटक के श्रीनिवास गौड़ा ने हाल ही में हुई बफेलो रेस में 13.62 सेकेंड में 142.50 मीटर दूरी तय की। ऐसा करके वह कर्नाटक के पारंपरिक खेल में इतिहास के सबसे तेज धावक बन गए हैं। 
 
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kambala race - फोटो : Twitter
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विस्तार
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कर्नाटक के रहने वाले श्रीनिवास गौड़ा (28) ने हाल ही में हुई बफेलो रेस (भैंसा दौड़) में 13.62 सेकेंड में 142.50 मीटर दूरी तय की। ऐसा करके वह कर्नाटक के पारंपरिक खेल में इतिहास के सबसे तेज धावक बन गए हैं। अब गौड़ा की तुलना दुनिया के सबसे तेज धावक उसेन बोल्ट से की जा रही है। बोल्ट के नाम 100 मीटर रेस में 9.58 सेकेंड का वर्ल्ड रिकॉर्ड है। 

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श्रीनिवास दक्षिण कन्नड़ जिले के मूदाबिदरी के रहने वाले हैं। उन्होंने इस पारंपरिक खेल के 30 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। कंबाला में रिकॉर्ड बनाने के बाद हर तरफ श्रीनिवास की चर्चा की जा रही है।

जैसे ही गौड़ा ने 13.62 सेकंड में 142.50 मीटर दौड़ पूरी की तो लोगों ने गणना शुरू की कि 100 मीटर में उनकी गति क्या रही होगी। जब इस बात का आकंलन किया गया तो पता चला कि गौड़ा ने 100 मीटर की दूरी महज 9.55 सेकेंड में पूरी की, जो उसेन बोल्ट के रिकॉर्ड टाइमिंग से .03 सेकेंड कम है। बोल्ट के नाम 100 मीटर रेस में 9.58 सेकेंड का वर्ल्ड रिकॉर्ड है। 
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हालांकि गौड़ा के रिकॉर्ड की तुलना सीधे तौर पर बोल्ट से नहीं की जा सकती है, क्योंकि श्रीनिवास भैंसों के जोड़े के साथ कीचड़ में दौड़ रहे थे। इस दौरान रफ्तार कुछ अलग हो जाती है। बोल्ट से तुलना के बिना भी गौड़ा का यह कमाल अपने आप में उल्लेखनीय है।

श्रीनिवास की दौड़ ने उन्हें रातोंरात सनसनी बना दिया है। गौड़ा ने मीडिया को बताया कि लोगों द्वारा मिल रही प्रतिक्रियाओं से वह काफी आश्चर्यचकित है। उन्होंने कहा कि मैं कंबाला से प्यार करता हूं। मेरी सफलता का श्रेय मेरी दो भैंसों को भी जाना चाहिए। वे बहुत अच्छी तरह से दौड़े।

क्या है कंबाला रेस

कंबाला रेस या बफेलो रेस कर्नाटक का पारंपरिक खेल है। यह खेल कीचड़ वाले इलाके में आयोजित किया जाता है। कर्नाटक के तटीय इलाको मंगलूरू और उडुपी में यह खेल काफी प्रचलित है। यहां के कई गांवों में कंबाला का आयोजन किया जाता है, जिसमें दर्जनों उत्साही युवा अपनी सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षित भैंसों के साथ भाग लेते हैं। 

श्रीनिवास के इस दौड़ के बाद से इंटरनेट पर उनकी काफी चर्चा हो रही है। सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें ओलंपिक में भेजने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा श्रीनिवास को दौड़ की ट्रेनिंग करने की व्यवस्था की जाए। 

कंबाला पर लगाया गया था प्रतिबंध

जानवरों के संरक्षण करने वालों कार्यकर्ताओं ने कुछ साल पहले कंबाला पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। उनका आरोप था कि जॉकी बल प्रयोग कर तेज दौड़ने के लिए भैंसों को मजबूर करता है। इसके बाद कंबाला पर कुछ वर्ष के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया था। हालांकि, तब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने एक विशेष कानून पारित कर खले को जारी करवाया था। 

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