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कर्नाटक: कांग्रेस-जेडीएस सरकार पर संकट के बादल, बागियों पर भाजपा की नजर!

Mon, 24 Dec 2018 06:14 PM IST
अमित मंडल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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HD Kumarswamy
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कर्नाटक में कैबिनेट विस्तार के बाद कांग्रेस-जेडीएस सरकार नए संकट में फंस गई है। कई कांग्रेस नेता कैबिनेट में जगह नहीं दिए जाने से नाराज हैं। फेरबदल के तरह दो मंत्रियों कांग्रेस के रमेश जारकिहोली और निर्दलीय विधायक आर शंकर को कैबिनेट से बाहर कर दिया गया और 8 नए मंत्रियों को जगह दी गई है। अब इसे लेकर सियासी संग्राम की जमीन बनती दिख रही है। 

कई नेता नाराज 

इस कैबिनेट फेरबदल से अब सरकार पर संकट नजर आने लगा है। कैबिनेट से बाहर किए गए जारकिहोली ने पार्टी ही छोड़ने की धमकी दी है। पूर्व मंत्री रामलिंगा रेड्डी सहित कांग्रेस के कई नेता कैबिनेट में जगह नहीं दिए जाने से नाखुश हैं। वहीं, पार्टी के कुछ बड़े नेता इसे खुलकर जाहिर नहीं कर रहे हैं। 
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कांग्रेस में उपजे इस असंतोष पर भाजपा की भी नजर बनी हुई है। इस पर भाजपा नेताओं के बयान भी आने लगे हैं। केंद्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा ने कहा कि पार्टी कांग्रेस के ऐसे विद्रोहियों का स्वागत करेगी। इससे राज्य में आने वाले सियासी संकट को लेकर कयासबाजी शुरू हो गई है। 

ऑडियो टेप हो रहा वायरल 

इसे लेकर एक निजी चैनल से जारकिहोली की बातचीत का ऑडियो टेप वायरल हो रहा है। इसमें कथित रूप से जारकिहोली से रिपोर्टर पूछ रहा है कि वह इस्तीफा देंगे। इस पर वह कह रहे हैं कि एक सप्ताह में इस्तीफा दे दूंगा। साथ ही उन्होंने कहा कि वह अभी कांग्रेस छोड़ने वाले दूसरे विधायकों के नाम का खुलासा नहीं करेंगे।  

 
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सात बार के विधायक कांग्रेस नेता रामालिंगा रेड्डी और उनकी बेटी सौम्या रेड्डी, जो जयनगर से विधायक हैं, कैबिनेट विस्तार को लेकर नाराज हैं। दोनों को कैबिनेट में जगह मिलने की उम्मीद थी लेकिन निराशा ही हाथ लगी। कैबिनेट विस्तार के बाद नाखुश रामालिंगा ने कहा कि पार्टी में कुछ ऐसे लोग हैं जो नहीं चाहते कि वह सरकार में मंत्री बनें। 

जयनगर से विधायक सौम्या रेड्डी ने अपनी नाखुशी साफ तौर पर जाहिर कर दी। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि 7 बार के विधायक और 4 बार मंत्री रह चुके उनके पिता कैबिनेट में जगह पाने के हकदार थे। उन्होंने कहा कि बेंगलुरू में 15 कांग्रेस विधायक तो उनके पिता की वजह से ही बने। 

बड़े नेताओं-विधायकों की नाराजगी के बाद कांग्रेस-जेडीएस में नई लड़ाई की शुरुआत हो सकती है। क्योंकि महज 17 विधायक होने के बावजूद कई विधायक मंत्री बने बैठे हैं और कुमारस्वामी को सीएम पद मिला है। अगर इस्तीफों का दौर शुरू हुआ तो सरकार के सामने बड़ा संकट पैदा हो जाएगा। इसका फायदा सीधे तौर पर भाजपा को ही होगा। 

 
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