कर्नाटक राज्य होटल एसोसिएशन ने सरकार के सामने एक बहुत बड़ी और अहम मांग रख दी है। उन्होंने 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी गैस सिलिंडर पर लगने वाले जीएसटी को 18 प्रतिशत से घटाकर तुरंत 5 प्रतिशत करने को कहा है। अगर सरकार ऐसा नहीं करती है, तो आम जनता के लिए बाहर रेस्टोरेंट में खाना बहुत ज्यादा महंगा हो सकता है। गैस सिलिंडर के दाम में अचानक हुई भारी बढ़ोतरी से होटल और रेस्टोरेंट चलाने वाले लोग काफी परेशान हो गए हैं और उनके व्यापार पर भारी संकट आ गया है। यह सीधा आम लोगों की जेब पर भी असर डालने वाला है।
सिलिंडर के दाम अचानक इतने क्यों बढ़े?
शुक्रवार को 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर की कीमत में 993 रुपये की बहुत बड़ी बढ़ोतरी की गई है। यह अब तक की सबसे बड़ी और रिकॉर्ड बढ़ोतरी मानी जा रही है, जिससे हर कोई परेशान है। पश्चिमी एशिया में चल रहे युद्ध और तनाव की वजह से दुनिया भर में ऊर्जा और गैस की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इसी कारण से लगातार तीसरे महीने कमर्शियल गैस सिलिंडर के दाम में यह भारी इजाफा देखने को मिला है। तेल विपणन कंपनियों द्वारा लिए गए इस फैसले से होटल और रेस्टोरेंट का दैनिक खर्च बहुत ज्यादा बढ़ गया है।
सिलिंडर की कीमतें कितनी ज्यादा बढ़ीं?
होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष जी. के. शेट्टी ने बताया कि पिछले सिर्फ 60 दिनों के भीतर गैस की कीमतों में 1,308 रुपये की बंपर वृद्धि हुई है। मार्च के महीने में जो सिलिंडर 1,800 से लेकर 2,000 रुपये तक में आसानी से मिल जाता था, वह अब बढ़कर 3,100 रुपये से ज्यादा का हो गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि सिर्फ दो महीने के छोटे से समय में कीमतों में 50 प्रतिशत से लेकर 70 प्रतिशत तक का भारी उछाल आ गया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने तुरंत कोई कदम नहीं उठाया, तो होटलों को अपने नुकसान की भरपाई के लिए खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ाने ही पड़ेंगे।
अभी और क्या-क्या बड़ी चुनौतियां हैं?
होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पहले से ही पिछले कुछ वर्षों के झटकों से उबरने की कोशिश कर रहा है और अब यह नया संकट आ गया है। पश्चिमी एशिया में युद्ध की वजह से ग्लोबल सप्लाई चैन (आपूर्ति श्रृंखला) पर बहुत बुरा असर पड़ा है और एलपीजी की बाजार में कमी भी हो रही है। अध्यक्ष शेट्टी का कहना है कि एलपीजी गैस के महंगे होने से पूरे राज्य में होटलों की लागत बढ़ गई है और महंगाई का दबाव और ज्यादा तेज हो जाएगा।
ईंधन की बढ़ती लागत के साथ-साथ बंगलूरू जैसे शहरों में कचरा उठाने का शुल्क (Garbage collection charges) और अन्य स्थानीय खर्चे भी बहुत बढ़ गए हैं। इन सभी कारणों और आर्थिक दबावों की वजह से कई छोटे और मध्यम दर्जे के होटल हमेशा के लिए बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं।
एलपीजी पर जीएसटी घटाने से क्या फायदा होगा?
एसोसिएशन का मजबूती से कहना है कि अगर सरकार जीएसटी को 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर देती है, तो इससे बढ़ती लागत को काबू करने में बहुत मदद मिलेगी। टैक्स कम होने से संघर्ष कर रहे होटल उद्योग को तुरंत एक बहुत बड़ी राहत मिल सकेगी और वे अपना व्यापार आसानी से चला पाएंगे। इसका सीधा फायदा ग्राहकों और आम जनता को भी मिलेगा, क्योंकि उन पर महंगी थाली और महंगे खाने का नया बोझ नहीं डाला जाएगा। एसोसिएशन ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों से जोरदार अपील की है कि वे इस मामले की गंभीरता को समझें और जल्द से जल्द कोई ठोस फैसला लें।
होटल सेक्टर को बचाना क्यों है बहुत जरूरी?
जी. के. शेट्टी ने कहा कि होटल और हॉस्पिटैलिटी (आतिथ्य) उद्योग देश में रोजगार देने और पूरी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में एक बहुत बड़ा योगदान देता है। ऐसे मुश्किल समय में इस क्षेत्र को बचाना और इसे सहारा देना लंबे समय के लिए बहुत जरूरी है। एसोसिएशन सरकार और नीति निर्माताओं के साथ मिलकर काम करने और समाधान निकालने के लिए पूरी तरह से तैयार है। लेकिन, उन्होंने जोर देकर कहा है कि अगर तुरंत कोई सरकारी सहायता नहीं मिली, तो बहुत सारे होटल बंद हो जाएंगे और बड़ी संख्या में लोग अपनी नौकरी खो देंगे।
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