फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Court: कर्नाटक हाईकोर्ट में वकील की अभद्र टिप्पणी का वीडियो वायरल, पूर्व मंत्री बोले- चौंकाने वाला व्यवहार

Thu, 17 Jul 2025 09:28 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू

सार

कर्नाटक हाईकोर्ट की कार्यवाही के दौरान एक वरिष्ठ वकील द्वारा न्यायाधीश के सामने माइक पर अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल का वीडियो सामने आया है। भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री एस सुरेश कुमार ने यह वीडियो फेसबुक पर साझा कर घटना की निंदा की है।

विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई (फाइल)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कर्नाटक हाईकोर्ट की खुली अदालत में एक वरिष्ठ वकील द्वारा जज के सामने माइक पर आपत्तिजनक और अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने का वीडियो सामने आया है। इस वीडियो को वरिष्ठ भाजपा विधायक और पूर्व कानून मंत्री एस सुरेश कुमार ने अपने फेसबुक अकाउंट पर साझा किया। उन्होंने इसे वास्तव में चौंकाने वाला व्यवहार बताया और इसकी कड़ी निंदा की।
विज्ञापन


पूर्व मंत्री सुरेश कुमार ने वीडियो साझा करते हुए लिखा कि खुली अदालत में इस तरह का व्यवहार वाकई चौंकाने वाला है। इसकी कड़ी निंदा की जानी चाहिए। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह घटना किस दिन की है। लेकिन वीडियो से ऐसा प्रतीत होता है कि यह घटना न्यायमूर्ति एम जी उमा की अदालत में हुई थी।

वीडियो की प्रमाणिकता और तारीख पर सस्पेंस
यह अभी स्पष्ट नहीं है कि वीडियो कब रिकॉर्ड किया गया और सुरेश कुमार को यह कैसे प्राप्त हुआ। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कई बार संपर्क करने के बावजूद उन्होंने इस विषय में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वीडियो में वकील को न्यायाधीश के सामने माइक पर अशोभनीय भाषा बोलते हुए देखा जा सकता है।
विज्ञापन


लाइव स्ट्रीमिंग से हुई घटना की रिकॉर्डिंग
कर्नाटक हाईकोर्ट की कार्यवाहियों की लाइव स्ट्रीमिंग के चलते यह वीडियो रिकॉर्ड हुआ और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। आमतौर पर अदालतों में वकीलों और न्यायाधीशों के बीच की भाषा औपचारिक और मर्यादित होती है, लेकिन यह वीडियो उस मर्यादा के उल्लंघन का प्रतीक बन गया है।

ये भी पढ़ें- 'क्या गारंटी है कि कांग्रेस नेता मुझसे पहले जेल नहीं जाएंगे?' सीएम हिमंत सरमा का राहुल गांधी को जवाब

विधायकों और वकीलों से आ रही प्रतिक्रियाएं
घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। कई वकीलों और विधायकों ने इसे न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा के खिलाफ बताया। अब इस मामले में कर्नाटक बार काउंसिल और हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- 'रीति-रिवाज समय में अटके नहीं रह सकते', आदिवासी महिला को पैतृक संपत्ति में सुप्रीम कोर्ट ने दिया अधिकार

न्यायपालिका की गरिमा और अनुशासन का सवाल
यह घटना न्यायपालिका की गरिमा और अदालत के अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े करती है। वरिष्ठ वकीलों से उम्मीद की जाती है कि वे अदालत में अपने आचरण और भाषा का विशेष ध्यान रखें। फिलहाल अदालत या संबंधित वकील की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन उम्मीद है कि इस मामले में जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।



 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें