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Karnataka: कर्नाटक हाईकोर्ट ने पंचमसाली आरक्षण पर लगी रोक हटाई, राज्य सरकार के लिए फैसला लेने का रास्ता साफ

Fri, 24 Mar 2023 01:02 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, बंगलूरू।

सार

पंचसाली जाति लिंगायत समुदाय के अंतर्गत आती है, जो राज्य की आरक्षण सूची की 2ए श्रेणी में जाति को शामिल करने की मांग कर रही है।
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कर्नाटक उच्च न्यायालय। - फोटो : PTI
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विस्तार
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कर्नाटक उच्च न्यायालय ने गुरुवार को पंचमसाली जाति के लोगों को आरक्षण देने पर पूर्व में लगाई गई रोक हटा दी। इसके साथ ही राज्य सरकार के लिए इस मामले में फैसला लेने का रास्ता साफ हो गया है। इससे पहले, 12 जनवरी को अदालत ने कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा पेश अंतरिम रिपोर्ट पर कोई भी कदम उठाने पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था।

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पंचसाली जाति लिंगायत समुदाय के अंतर्गत आती है, जो राज्य की आरक्षण सूची की 2ए श्रेणी में जाति को शामिल करने की मांग कर रही है। गौरतलब है कि डीजी राघवेंद्र नामक याचिकाकर्ता ने कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर पंचमसाली जाति को आरक्षण सूची की 2ए श्रेणी में शामिल करने के खिलाफ उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (पीआईएल) दाखिल की थी।

मुख्य न्यायाधीश प्रसन्ना बी वराले की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने गुरुवार को आरक्षण पर यथास्थिति कायम रखने के आदेश को रद्द कर दिया। इसके साथ ही राज्य सरकार के लिए हाल के विधानसभा सत्र में समुदाय को आरक्षण देने की घोषणा को लागू करने का रास्ता साफ हो गया है। 
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सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उच्च न्यायालय को अवगत कराया कि सरकार का आरक्षण की मौजूदा 2ए श्रेणी में गड़बड़ी करने का कोई इरादा नहीं है, इसलिए यथास्थिति के आदेश को रद्द किया जाए। उन्होंने इस संबंध में एक लिखित हलफनामा देने का भी वादा किया। प्रस्तुतियों पर विचार करते हुए उच्च न्यायालय ने रोक हटा दी, लेकिन यह स्पष्ट कर दिया कि कोई भी कार्रवाई याचिका में अदालत के अंतिम निर्णय के अधीन होगी।

राज्य सरकार ने लिंगायत और वोक्कालिगा समुदायों को शामिल करने के लिए क्रमशः 2सी और 2डी नामक अलग-अलग श्रेणियां बनाने का फैसला किया था। जनहित याचिका में आरोप लगाया गया था कि सरकार आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर पंचमसालियों को आरक्षण की 2ए श्रेणी में शामिल कर सकती है। याचिकाकर्ता राघवेंद्र डीजी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रोफेसर रविवर्मा कुमार ने पहले तर्क दिया था कि कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने अपने आयोग की सलाह संख्या 71/2000 को वर्ष 2000 में सरकार को पेश किया था, जिसमें लिंगायत के कुछ उप-समूहों के दावों को खारिज कर दिया था। चूंकि इस तरह के अनुरोध को आयोग ने 2000 में ही खारिज कर दिया था, इसलिए अदालत से अनुरोध किया गया था कि वह सरकार को अभी पंचसाली जाति को आरक्षण सूची की 2ए श्रेणी में शामिल करने से रोके।

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