फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Karnataka: येदियुरप्पा के खिलाफ POCSO केस रद्द करने से हाईकोर्ट से इनकार, राजनीतिक साजिश का दावा किया खारिज

Thu, 13 Nov 2025 04:17 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू

सार

कर्नाटक हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ POCSO केस को रद्द करने से इनकार किया। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि येदियुरप्पा की व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक होने पर ही मांगी जाए। यह मामला 2024 में बंगलूरू में एक नाबालिग से यौन शोषण से जुड़ा है, जिसकी जांच सीआईडी कर रही है।
विज्ञापन
कोर्ट। - फोटो : Adobe Stock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता बी.एस. येदियुरप्पा के खिलाफ दर्ज POCSO (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस) केस को रद्द करने से इनकार कर दिया। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के संज्ञान लेने और समन जारी करने के आदेश को सही ठहराया, जबकि व्यक्तिगत पेशी में राहत दी।

विज्ञापन


न्यायमूर्ति एम.आई. अरुण की एकल पीठ ने कहा कि येदियुरप्पा की व्यक्तिगत उपस्थिति ट्रायल के दौरान आवश्यक होने पर ही मांगी जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर वे छूट की याचिका दायर करते हैं, तो उसे विचार योग्य माना जाए। हालांकि, येदियुरप्पा को ट्रायल कोर्ट से डिस्चार्ज की मांग करने की स्वतंत्रता दी गई है।

केस का पृष्ठभूमि
यह मामला फरवरी 2024 का है जब एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी कि येदियुरप्पा ने उसकी 17 वर्षीय बेटी से अपने बंगलूरू स्थित आवास पर कथित यौन शोषण किया। शिकायत के आधार पर सदाशिवनगर पुलिस ने 14 मार्च 2024 को मामला दर्ज किया, जिसे बाद में सीआईडी को ट्रांसफर कर दिया गया। एजेंसी ने मामले की पुनः जांच कर चार्जशीट दाखिल की।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- मेनका गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बताया अव्यवहारिक, कहा- पशुओं के प्रति दया भावना जरूरी

येदियुरप्पा की दलीलें
वरिष्ठ अधिवक्ता सी.वी. नागेश ने अदालत में कहा कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है और शिकायत अविश्वसनीय है। उन्होंने बताया कि पीड़िता और उसकी मां कई बार बंगलूरू पुलिस कमिश्नर से मिलीं, लेकिन उन्होंने मार्च तक कोई आरोप नहीं लगाया। नागेश ने यह भी कहा कि मौके पर मौजूद गवाहों ने किसी अनुचित घटना से इनकार किया है।
विज्ञापन


अभियोजन पक्ष का पक्ष
स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर प्रोफेसर रविवर्मा कुमार ने अदालत में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने सभी साक्ष्यों, जिसमें पीड़िता का बयान भी शामिल है, का गहराई से अध्ययन कर संज्ञान लिया था। उन्होंने दलील दी कि अदालत का आदेश तर्कसंगत और न्यायिक दृष्टि से उचित था, इसलिए इसे रद्द करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें