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बंगलूरू पुलिस की कार्रवाई पर हाईकोर्ट सख्त: हिंदू संगठन नेता को उडुपी से क्यों लाया गया? सीसीटीवी पर भी सवाल

Sun, 30 Aug 2026 02:32 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू

सार

बंगलूरू में हिंदू जनजागृति समिति के संयोजक मोहन गौड़ा को उडुपी से पूछताछ के लिए लाने के मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने पूछा कि जब उन्हें तीन दिन बाद पुलिस के सामने पेश होने का नोटिस दिया गया था, तो उन्हें तुरंत बंगलूरू लाने की जरूरत क्यों पड़ी। सीसीटीवी बंद होने की पुलिस की दलील पर भी सवाल उठे। आखिर पुलिस ने ऐसा कदम क्यों उठाया और अदालत ने इसे नागरिक की स्वतंत्रता से कैसे जोड़ा? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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सीसीटीवी फुटेज को लेकर अदालत ने क्या कहा? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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कर्नाटक हाईकोर्ट ने शनिवार को व्हाइटफील्ड पुलिस की कार्रवाई पर कड़े सवाल उठाए। मामला हिंदू जनजागृति समिति के संयोजक मोहन गौड़ा से जुड़ा है। पुलिस उन्हें उडुपी से बंगलूरू लेकर आई थी। जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने पूछा कि जब गौड़ा को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी बीएनएसएस की धारा 35(3) के तहत तीन दिन बाद पुलिस के सामने पेश होने का नोटिस दिया गया था, तो पुलिस को उसी दौरान उडुपी जाकर उन्हें बंगलूरू लाने की जरूरत क्यों पड़ी।

क्या पुलिस ने गौड़ा को गिरफ्तार किया था?

पुलिस के उप पुलिस आयुक्त ने अदालत को बताया कि गौड़ा को गिरफ्तार नहीं किया गया था। उनका बयान दर्ज किया गया और बाद में उन्हें वापस भेज दिया गया। हालांकि, अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। जस्टिस नागप्रसन्ना ने कहा कि किसी व्यक्ति को पुलिस के पास लाकर उसकी स्वतंत्रता प्रभावित की गई है। अदालत ने साफ कहा कि अगर व्यक्ति तय समय पर पुलिस के सामने पेश नहीं होता, तब कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन उससे पहले पुलिस की शक्ति का इस्तेमाल मनमाना बन सकता है।

सीसीटीवी फुटेज को लेकर कोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान व्हाइटफील्ड पुलिस स्टेशन के सीसीटीवी कैमरों को लेकर भी अदालत ने पुलिस को घेरा। पुलिस ने बताया कि बिजली में उतार-चढ़ाव के कारण सीसीटीवी सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहा था। इस पर जस्टिस नागप्रसन्ना ने व्यंग्य करते हुए पुलिस स्टेशन का नाम व्हाइटफील्ड की जगह डार्कफील्ड पुलिस स्टेशन रखने तक की बात कह दी। अदालत ने पूछा कि जब मामला पहले भी एक समन्वय पीठ के सामने आया था, तब सीसीटीवी फुटेज क्यों उपलब्ध नहीं था।

पुलिस की कार्रवाई पर अदालत ने और क्या सवाल उठाए?

  • अदालत ने इस बात पर भी सवाल किया कि रात करीब दो बजे एक कांस्टेबल ने शिकायत दर्ज की और उसके बाद पुलिसकर्मी उडुपी चले गए।
  • जज ने पूछा कि आखिर किसके निर्देश पर यह कार्रवाई की गई। पुलिस ने कहा कि गौड़ा अपनी कार से आए थे और खुद आने के लिए तैयार थे।
  • इस पर अदालत ने सवाल किया कि कौन व्यक्ति खुद पुलिस स्टेशन आने के लिए तैयार होगा।
  • अदालत ने यह भी कहा कि केवल वर्दी पहनने से किसी अधिकारी को कानून से ऊपर अधिकार नहीं मिल जाता।
  • जज ने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच और सेवा रिकॉर्ड में प्रतिकूल टिप्पणी की जा सकती है।

मामला किस बयान और कार्रवाई से जुड़ा है?

यह मामला उस सोशल मीडिया पोस्ट के बाद शुरू हुआ, जिसमें गौड़ा ने हास्य कलाकार कुणाल कामरा के प्रस्तावित बंगलूरू कार्यक्रम के रद्द होने को हिंदू एकता की जीत बताया था। पुलिस का आरोप था कि इस पोस्ट से सामाजिक सौहार्द प्रभावित हुआ। इसी मामले में अदालत ने स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्यवाही शुरू की। सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि नागरिकों की स्वतंत्रता को केवल इसलिए हल्के में नहीं लिया जा सकता क्योंकि कार्रवाई करने वाला व्यक्ति वर्दी में है।

हाईकोर्ट ने आगे क्या संकेत दिया?

अदालत ने कहा कि वह पुलिस कार्रवाई के संबंध में आदेश जारी करेगी। जस्टिस नागप्रसन्ना ने यह भी कहा कि पुलिस अधिकारियों को कानून के मुताबिक काम करना होगा और कानून की अनदेखी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच हो सकती है। अदालत ने पुलिस महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक को सभी थानों के लिए कानून का पालन सुनिश्चित करने संबंधी दिशा-निर्देश जारी करने की बात भी कही। सुनवाई में व्हाइटफील्ड पुलिस से जुड़े एक अन्य संपत्ति विवाद का भी उल्लेख हुआ, जिस पर अदालत ने चिंता जताई।
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