न्यायमूर्ति इलांथिरैयान ने तमिलनाडु पुलिस को निर्देश दिया कि वह छह नवंबर को रैली आयोजित करने के लिए आरएसएस को अनुमति दें। अदालत ने स्पष्ट किया कि आदेश का उल्लंघन करने पर अधिकारियों को अवमानना कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) चुनावों में ओबीसी और महिला आरक्षण के लिए सरकारी अधिसूचना को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने 30 नवंबर तक नई अधिसूचना जारी करने और 31 दिसंबर तक बीबीएमपी चुनाव कराने का आदेश भी दिया है।
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वहीं, तमिलनाडु में मद्रास उच्च न्यायालय के जस्टिस जीके इलांथिरैयन ने आरएसएस के तिरुवल्लूर के संयुक्त सचिव आर कार्तिकेयन द्वारा दायर की गई अदालत की अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रहे हैं। याचिका पुलिस के खिलाफ दो अक्तूबर को रूट मार्च की अनुमति नहीं देने के लिए दायर की गई है।
न्यायमूर्ति इलांथिरैयान ने तमिलनाडु पुलिस को निर्देश दिया कि वह छह नवंबर को रैली आयोजित करने के लिए आरएसएस को अनुमति दें। अदालत ने स्पष्ट किया कि आदेश का उल्लंघन करने पर अधिकारियों को अवमानना कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
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सुनवाई के दौरान सरकार ने दलील पेश की कि पीएफआई पर प्रतिबंध, एनआईए के छापे और पेट्रोल बम हमलों जैसे मुद्दों के कारण 22 सितंबर के बाद करीब 52 हजार पुलिसकर्मी सुरक्षा के लिए सड़कों पर तैनात हैं। ऐसे में गांधी जयंती के दिन रूट मार्च निकालने से तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है।
इस पर कोर्ट ने भी सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि वह इन स्थितियों की जमीनी हकीकत और खतरे को देख रहे हैं। इसके बाद आरएसएस को आयोजन 6 नवंबर को करने की इजाजत देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि रैलियां निकालने और जनसभाएं करने के लिए 22 सितंबर के अपने आदेश में निर्धारित सभी शर्तें 6 नवंबर के कार्यक्रम में भी लागू होंगी।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने यह कहा
दरअसल, भाजपा सरकार ने कर्नाटक हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। कोर्ट ने बेंगलुरु में वार्डों के आरक्षण की सूची को सुधारने और अंतिम रूप देने के लिए भाजपा सरकार की याचिका को खारिज करते हुए सरकार से 31 दिसंबर तक नगर निकायों के लिए चुनाव प्रक्रिया पूरी करने को कहा। कोर्ट ने कहा कि महिलाओं और ओबीसी के लिए आरक्षण ठीक ढंग से नहीं किया गया।