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कर्नाटक हाईकोर्ट: सोशल मीडिया पोस्ट पर केस रद्द, पुलिस को सख्त दिशानिर्देश

Fri, 23 Oct 2026 11:58 PM IST
ज्योति भास्कर पीटीआई, बंगलूरू।

सार

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने संदीप कुमार के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट पर दर्ज आपराधिक मामला रद किया। अदालत ने पुलिस को सोशल मीडिया पोस्ट पर मामले दर्ज करने और गिरफ्तारी के संबंध में सख्त दिशानिर्देश जारी किए।
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कर्नाटक उच्च न्यायालय - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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कर्नाटक उच्च न्यायालय ने सोशल मीडिया अकाउंट 'कर्नाटक पोर्टफोलियो' के प्रशासक संदीप कुमार के खिलाफ दर्ज एक आपराधिक मामला रद कर दिया है। यह मामला पुत्तूर में छह युवकों द्वारा एक महिला को चाकू से धमकाने की रिपोर्ट को दोबारा पोस्ट करने से जुड़ा था। अदालत ने कहा कि आरोपों से विभिन्न समुदायों के बीच दुश्मनी या नफरत को बढ़ावा देने के इरादे से झूठी जानकारी फैलाने का अपराध नहीं बनता है। न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना ने 16 अक्तूबर को सुनाए गए अपने आदेश में पुलिस के लिए महत्वपूर्ण दिशानिर्देश भी जारी किए।

ये दिशानिर्देश सोशल मीडिया पोस्ट पर आपराधिक मामलों के यांत्रिक पंजीकरण, एक ही घटना से कई एफआईआर दर्ज होने और पुलिस शक्तियों के मनमाने प्रयोग को रोकने के लिए हैं। पीठ ने यह आदेश संदीप कुमार द्वारा दायर एक याचिका पर दिया, जिसका प्रतिनिधित्व अधिवक्ता गिरीश भारद्वाज ने किया। अदालत ने कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक को इन दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। अदालत ने टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता ने कोई अकेली या उत्पन्न घटना दोबारा पोस्ट नहीं की थी। यह छह युवकों द्वारा एक समूह बनाकर एक महिला का थार एसयूवी में पीछा करने और उसे बार-बार धमकाने की गंभीर घटना थी। प्रशासक ने केवल "कानून और व्यवस्था खतरे में" ट्वीट किया था। अदालत ने पाया कि शिकायत और प्रशासक की पोस्ट में किसी धार्मिक समूह का नाम नहीं था, न ही सांप्रदायिक वैमनस्य को बढ़ावा देने का इरादा इंगित किया गया था। अदालत ने उच्चतम न्यायालय के निर्णयों पर भरोसा किया, जिसमें समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने का अपेक्षित इरादा अपराध के आवश्यक तत्वों में शामिल है। इसने बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सांविधानिक संरक्षण पर भी जोर दिया।

पुलिस को क्या निर्देश दिए गए?

अदालत ने अपने दिशानिर्देशों के तहत पुलिस को सोशल मीडिया पोस्ट से उत्पन्न कथित अपराध के तत्वों की बारीकी से जांच करने का निर्देश दिया। पुलिस को एक ही घटना से संबंधित लगातार शिकायतों की भी जांच करनी होगी। नए मामले दर्ज करने से बचना होगा, केवल इसलिए कि शिकायतकर्ता अलग हैं, जब तक कि कानूनी रूप से अलग अपराध सामने न आए।

गिरफ्तारी के नियम क्या हैं?

अदालत ने यह भी कहा कि किसी अपराध का पंजीकरण स्वतः गिरफ्तारी में परिणत नहीं होना चाहिए। पुलिस को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35 के तहत दिए गए सुरक्षा उपायों का पालन करने का निर्देश दिया गया। यह सुनिश्चित करेगा कि गिरफ्तारी मनमानी न हो और उचित प्रक्रिया का पालन किया जाए।

संदीप कुमार को राहत क्यों मिली?

अदालत ने कुमार की याचिका स्वीकार कर ली और पुत्तूर पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर रद कर दी। अदालत ने पाया कि उनके पोस्ट में सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने का कोई इरादा नहीं था। कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि दिशानिर्देशों का अक्षरशः और भावना से पालन किया जाए।

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