कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य परिवहन निगम की 20 मई से होने वाली हड़ताल पर रोक लगा दी है। अदालत ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया, जो परिवहन निगम के कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका है।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य परिवहन निगम (RTC) के कर्मचारियों द्वारा 20 मई से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन बस हड़ताल पर रोक लगा दी है। अदालत के इस फैसले से हड़ताल का आह्वान करने वाली परिवहन यूनियनों को बड़ा झटका लगा है। जस्टिस सूरज गोविंदराज और जस्टिस के. मनमधा राव की खंडपीठ ने राज्य सरकार और परिवहन यूनियनों को नोटिस जारी करते हुए परिवहन मंत्री के साथ बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया। अदालत ने यूनियनों को फिलहाल हड़ताल आगे न बढ़ाने और सरकार को बातचीत के जरिए समाधान निकालने की सलाह दी।
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याचिका में यूनियनों के फैसले को दी गई चुनौती
हाईकोर्ट ने यह अंतरिम आदेश घरेलू कामगार और निर्माण श्रमिक द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में प्रस्तावित हड़ताल को चुनौती दी गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि कर्नाटक आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (KESMA) के तहत 1 जनवरी से 30 जून तक परिवहन कर्मचारियों की हड़ताल पर रोक है। साथ ही श्रम आयुक्त द्वारा 18 जुलाई 2025 से शुरू की गई सुलह प्रक्रिया अभी जारी है और अगली सुनवाई 25 मई को तय है। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि सुलह प्रक्रिया के दौरान हड़ताल करना गैरकानूनी होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यूनियनों ने अनिवार्य 14 दिन की बजाय केवल 7 दिन का नोटिस दिया है।
छात्रों की परीक्षा होने की दलील
याचिका में यह भी कहा गया कि इसी दौरान एसएसएलसी (कक्षा 10) की सप्लीमेंट्री परीक्षाएं आयोजित होनी हैं, ऐसे में छात्रों और आम जनता के हित में हड़ताल रोकी जानी चाहिए। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने हड़ताल पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश पारित किया। दरअसल, राज्य परिवहन निगम कर्मचारियों ने 25 प्रतिशत वेतन वृद्धि और लंबित वेतन बकाया के भुगतान की मांग को लेकर 20 मई से राज्यव्यापी हड़ताल की चेतावनी दी थी। यूनियनों ने सरकार को 19 मई दोपहर तक मांगें मानने की समयसीमा दी थी। मांगें पूरी नहीं होने पर KSRTC, BMTC, NWKRTC और KKRTC की सेवाएं बंद करने का ऐलान किया गया था।