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RSS: कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस शर्त के साथ दी RSS को मार्च की इजाजत, प्रियांक खरगे बोले- एक बार के लिए ही अनुमति

Thu, 13 Nov 2025 05:45 PM IST
देवेश त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

प्रियांक खरगे ने कहा, ''सरकार ने हाईकोर्ट में आरएसएस को मार्च निकालने की इजाजत दी। सबसे जरूरी बात वो अपनी मर्जी से कुछ भी नहीं कर सकते हैं।''
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प्रियांक खरगे, मंत्री, कर्नाटक - फोटो : ANI
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विस्तार
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कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार (13 नवंबर, 2025) को आरएसएस को चित्तापुर में मार्च निकालने की इजाजत दे दी। हाईकोर्ट ने आरएसएस के कलबुर्गी के संयोजक की ओर से दायर एक याचिका पर ये फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने आगामी 16 नवंबर को 300 लोगों और 50 सदस्यीय बैंड के साथ मार्च निकालने की अनुमति दी। 

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जस्टिस एमजीएस कमल ने यह दर्ज किया कि चित्तापुर के तहसीलदार की ओर से कुछ शर्तों के साथ मार्च निकालने के लिए अनुमति पहले ही दी जा चुकी थी। बीते हफ्ते राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया था कि वह याचिकाकर्ता के प्रस्ताव पर सकारात्मक रूप से विचार करेगा.

कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियांक खरगे ने इस आदेश पर कहा, ''सरकार ने हाईकोर्ट में आरएसएस को मार्च निकालने की इजाजत दी। आरएसएस ने सरकार से कोई अनुमति नहीं मांगी थी। उन्होंने सरकार को एक मार्च निकालने की सूचना दी थी। सरकार की इजाजत मिलने में उन्हें एक महीने का समय लग गया। मार्च को लेकर साफ निर्देश हैं कि 300 से ज्यादा लोग और 50 से ज्यादा बैंड के सदस्य नहीं हो सकते हैं। साथ ही चित्तापुर से बाहर का कोई शख्स भी शामिल नहीं होगा। सबसे जरूरी बात वो अपनी मर्जी से कुछ भी नहीं कर सकते हैं। यह एक बार के लिए ही अनुमति है।''
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हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान आरएसएस की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अरुण श्याम ने कार्यक्रम की इजाजत देने के लिए प्रशासन का आभार जताया, लेकिन तहसीलदार के आदेश की दो शर्तों में संशोधन की गुजारिश की। याचिकाकर्ता के वकील ने 300 लोगों की जगह 600 लोगों के शामिल होने के लिए अनुमति मांगी और बैंड के सदस्यों की संख्या 25 से बढ़ाकर 50 करने का अनुरोध किया।

सरकार की ओर से पेश हुए अटॉर्नी जनरल शशि किरण शेट्टी ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता की ओर से पहले भी ऐसे मार्च निकाले गए हैं, जिनमें 100-150 लोग ही शामिल हुए हैं। हालांकि, उन्होंने बैंड के सदस्यों की संख्या बढ़ाए जाने का विरोध नहीं किया। राज्य सरकार की ओर से पेश तर्क से हाईकोर्ट सहमत हुई। अदालत ने बैंड के सदस्यों की संख्या बढ़ाने का निर्देश दिया और 300 लोगों के शामिल होने की ही अनुमति दी।

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