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Karnataka: बिना सहमति निजी फोटो-वीडियो शेयर करने पर होगी जेल, सरकार ने लागू किए नए नियम; जानें पूरा मामला

Fri, 26 Jun 2026 03:30 PM IST
अमन तिवारी आईएएनएस, बंगलूरू

सार

कर्नाटक सरकार ने निजी फोटो-वीडियो बिना मर्जी साझा करने पर तुरंत एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। गृह मंत्री ने कहा कि फोटो खींचने की सहमति का मतलब उसे शेयर करना नहीं है। 
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कर्नाटक सरकार का बड़ा फैसला - फोटो : PTI
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विस्तार
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कर्नाटक सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब राज्य में किसी भी व्यक्ति की निजी या अंतरंग तस्वीरें और वीडियो उसकी मर्जी के बिना साझा करने पर पुलिस को बिना किसी देरी के एफआईआर (FIR) दर्ज करनी होगी। गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने इस संबंध में पुलिस को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि ब्लैकमेल, सेक्सटॉर्शन जैसे साइबर अपराधों के खिलाफ पुलिस को अब और भी ज्यादा सख्त होना होगा।
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गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि निजता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने अहम फैसले में इसकी पुष्टि की है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई पुलिस अधिकारी पुराने नियमों का बहाना बनाकर एफआईआर दर्ज करने में देरी करता है या मना करता है, तो उसे गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। राज्य के सभी पुलिस कमिश्नरों और जिला पुलिस अधीक्षकों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।

राज्य के पुलिस महानिदेशक (DG & IGP) एमए सलीम ने इस आदेश को लागू करने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन नियमों में साफ तौर पर कहा गया है कि फोटो या वीडियो खींचने की अनुमति देने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उसे कहीं भी पोस्ट या साझा किया जा सकता है। अगर किसी पीड़ित ने शुरुआत में रिकॉर्डिंग के लिए सहमति दी थी, लेकिन बाद में उसकी मर्जी के बिना उसे फैलाया गया, तो यह एक संज्ञेय अपराध माना जाएगा। यह कानून पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए समान है।
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कानूनी प्रावधानों के तहत, भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 77 के अनुसार किसी महिला की निजी तस्वीरों को बिना मर्जी साझा करना दंडनीय है। पहली बार ऐसा करने पर एक से तीन साल और दोबारा अपराध करने पर तीन से सात साल की जेल हो सकती है। साथ ही जुर्माना भी देना होगा। सूचना प्रौद्योगिकी (IT) एक्ट की धारा 66(E) के तहत किसी के निजी अंगों की तस्वीर बिना मर्जी लेने या भेजने पर तीन साल की जेल या दो लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। अश्लील सामग्री ऑनलाइन भेजने पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और सात साल तक की जेल हो सकती है।

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नए नियमों के अनुसार, पुलिस को शिकायत मिलते ही तुरंत एफआईआर दर्ज करनी होगी। अगर मामला उस थाने के क्षेत्र में नहीं आता, तो भी 'जीरो एफआईआर' दर्ज करना अनिवार्य है। इसके बाद केस को संबंधित थाने में भेजा जाएगा। पुलिस को सोशल मीडिया कंपनियों को तुरंत नोटिस भेजकर आपत्तिजनक सामग्री हटवाने या ब्लॉक करवाने का निर्देश भी दिया गया है। पीड़ितों की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी और महिला पीड़ितों की शिकायत महिला पुलिस अधिकारी ही दर्ज करेंगी।
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