Karnataka Govt Forms Anti-Narcotic Task Force: कर्नाटक सरकार की यह पहल राज्य में बढ़ते नशे के व्यापार और इस्तेमाल को रोकने के लिए एक मजबूत कदम है। इसके तहत तकनीकी, कानूनी और पुलिस बल का संयुक्त उपयोग किया जाएगा ताकि युवा वर्ग को इस खतरे से बचाया जा सके।
कर्नाटक सरकार ने राज्य में नशे के बढ़ते खतरे को रोकने के लिए एक नई 'एंटी-नारकोटिक टास्क फोर्स (एएनटीएफ)' का गठन किया है। इसका मकसद नशे से जुड़े अपराधों पर लगाम लगाना है। राज्य सरकार की तरफ से 1 अगस्त को जारी आदेश के अनुसार, यह नई टास्क फोर्स राज्य के पुलिस महानिदेशक के मार्गदर्शन में काम करेगी और इसकी रिपोर्ट एडीजीपी, साइबर कमांड को दी जाएगी।
नई टास्क फोर्स में होंगे ये बदलाव
10 नई पोस्ट बनाई गई हैं, जिनमें दो अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) और दो सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) शामिल हैं। एंटी-नक्सल फोर्स (एएनएफ) से 56 कर्मचारियों को एएनटीएफ में स्थानांतरित किया गया है। इसमें दो इंस्पेक्टर और चार सब-इंस्पेक्टर भी शामिल हैं। टास्क फोर्स में फोरेंसिक, कानूनी विशेषज्ञ और डेटा विश्लेषक भी अनुबंध के आधार पर नियुक्त किए जाएंगे।
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साइबर क्राइम को लेकर भी बड़ा फैसला
राज्य सरकार ने पहले ही एक साइबर क्राइम प्रिवेंशन यूनिट बनाई है और अब राज्य की 43 सीईएन (साइबर, इकोनॉमिक और नारकोटिक्स) पुलिस स्टेशनों का नाम बदलकर सिर्फ साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन कर दिया गया है। अब ये थाने केवल आईटी एक्ट और साइबर अपराधों के तहत केस दर्ज करेंगे। नशीली दवाओं और आर्थिक अपराधों के केस इन थानों में दर्ज नहीं होंगे।
जहां जानकारी मिलेगी, वहीं तुरंत कार्रवाई होगी- परमेश्वर
कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि यह टास्क फोर्स पूरी तरह से नशे के खिलाफ कार्रवाई के लिए तैयार है और जहां भी जानकारी मिलेगी, वहीं तुरंत कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि सभी जिलों के एसपी को निर्देश दिए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि पहले से मौजूद एंटी-नक्सल फोर्स में से कुछ कर्मियों को एएनटीएफ में लाया गया है क्योंकि अब राज्य में नक्सल गतिविधियां नहीं के बराबर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो स्टाफ की फिर तैनाती की जाएगी।