बीएस येदियुरप्पा ने कर्नाटक के 25वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। वे तीसरी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं। बुधवार रातभर चले नाटकीय घटनाक्रम के बाद येदियुरप्पा ने आखिरकार शपथ ले ली। सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस की याचिका को खारिज करते हुए येदियुरप्पा के शपथग्रहण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को होने वाली सुनवाई में येदियुरप्पा की उस चिट्ठी को मंगवाया है जो उन्होंने राज्यपाल को लिखी है।
अब येदियुरप्पा को विधानसभा में बहुमत साबित करना होगा। हालांकि येदियुरप्पा ने 2008 के विधानसभा चुनाव के बाद कुछ ऐसी ही विपरीत परिस्थियों में बहुमत साबित कर दिखाया था।
कर्नाटक में 2008 के विधानसभा चुनावों के बाद जब जनता ने एक बंटा हुआ जनादेश दिया था तब बीजेपी ने 'ऑपरेशन कमल' के जरिये विधानसभा में बहुमत साबित किया था। वह फिर से वही फॉर्मूला दोहरा सकती है।
'ऑपरेशन कमल' बीजेपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा की एक कुख्यात रणनीति थी। 'ऑपरेशन कमल' के तहत येदियुरप्पा ने विपक्षी पार्टी के विधायकों को पैसे और ताकत के बल पर खरीद लिया था। बीजेपी ने जेडी(एस) और कांग्रेस के 20 विधायकों को तोड़ लिया था, जिसके बाद उन्होंने अपनी विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था और फिर 2008 और 2013 के बीच उपचुनाव में दोबारा चुनाव लड़ा।
2018 की विधानसभा में बीजेपी को सिर्फ 104 सीटें मिली हैं। बीजेपी को तकनीकी रूप से यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि कम से कम 5-6 विधायक इस्तीफा दे दें, जिससे बहुमत का जादुई आंकड़ा 106-108 हो जाए और यह सुनिश्चित कर दे कि बीजेपी उम्मीदवार उपचुनाव जीत जाएं।
संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी संभवना ज्यादा है कि कर्नाटक के राज्यपाल वाजुभाई वाला अपने विवेक के आधार पर भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में निर्देश दिया गया था। इसके मुताबिक सबसे ज्यादा विधायक संख्या वाली पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाना चाहिए।
वरिष्ठ वकील एच पी बावेश ने कहा, "वह पहले सबसे बड़ी पार्टी को आमंत्रित करेंगे, और यदि यह बहुमत साबित करने में नाकाम रहते हैं, तो राज्यपाल गठबंधन की सरकार का विकल्प चुन सकते हैं।"
2008 के विधानसभा चुनावों के बाद दलबदल कर बीजेपी में जानेवाले प्रमुख विधायकों में गुरुपुदप्पा नागमारापल्ली, आनंद असनोतिकर (करवार), जे नरसिम्हा स्वामी (दोद्दाबल्लापुर) और अभिनेता से नेता बने जग्गेश (तुरुवेकेरे) शामिल हैं।
दूसरा फॉर्मूला
बीजेपी एक अन्य रणनीति भी अपना सकती है। जिसके तहत जब राज्यपाल बीजेपी को सदन में विश्वास मत साबित करने का मौका दें तब वह कांग्रेस और जेडी(एस) के कुछ विधायकों को सदन में गैर-मौजूद रहने को कहें। इस रणनीति की अभी ज्यादा संभावना नजर आ रही है।
हालांकि यह आसान नहीं होगा क्योंकि कांग्रेस और जेडी(एस) अपने सदस्यों को व्हिप जारी कर सकती है। इससे एक संवैधानिक संकट पैदा हो सकता है और यह फिर ये मुद्दा अदालत जाएगा, जिससे बीजेपी को नई रणनीति तैयार करने के लिए कुछ राहत और समय मिल जाएगा।
निर्णायक सीट
राजराजेश्वरी (आरआर) नगर में 28 मई को मतदान की तारीख तय की गई है। जबकि जयनगर में चुनाव स्थगित कर दिए गए हैं। बीजेपी इन दोनों सीटों पर बहुत ज्यादा उम्मीदें होंगी ताकि विधानसभा में उनकी संख्या बढ़ जाए।