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Karnataka Election Result 2018: इन समीकरणों ने बीजेपी को पहुंचाया था सत्ता के करीब

Tue, 15 May 2018 01:50 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
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कर्नाटक विधानसभा
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कर्नाटक चुनाव में तीखे आरोप-प्रत्यारोप के बीच हुए मतदान के नतीजों का ऐलान दोपहर बाद तक हो जाएगा। लेकिन मतगणना के रूझानों में बीजेपी बहुमत की ओर है। कांग्रेस को पिछले चुनावों की तुलना में बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। वहीं जेडी(एस) को ना नफा हुआ है ना नुकसान। 
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कर्नाटक विधानसभा चुनाव जाति, धर्म, क्षेत्रीयता और विकास के मुद्दों के बीच चुनावी राजनीति के जटिल कॉकटेल में भी उलझा। लेकिन अब बड़ा सवाल है कि किस पार्टी ने किस वर्ग के मतदाताओं को कितना प्रभावित किया? आइए इस सवाल का जवाब जानते हैं बिंदुवार।  

1. लिंगायत समुदाय 

67 विधानसभा सीटों में लिंगायत समुदाय का प्रभाव है। चुनावी रूझानों के मुताबिक लिंगायतों ने भाजपा को अपना समर्थन दिया। इस समुदाय ने कांग्रेस को नकार दिया है। कांग्रेस को पिछले चुनाव परिणामों की तुलना में भारी नुकसान हुआ है। वहीं जेडीएस को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। 
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मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का लिंगायत को अल्पसंख्यक का दर्जा देने का फैसला भी कर्नाटक चुनाव नतीजों को प्रभावित नहीं कर पाया। कर्नाटक में 17 फीसदी आबादी वाला लिंगायत समुदाय राज्य का सबसे बड़ा वोट बैंक है। कर्नाटक में अधिकतर उसी पार्टी की सरकार बनती है, जिसके पक्ष में लिंगायत होते हैं। चाहे वह जनता दल के रामकृष्ण हेगड़े हों या कांग्रेस के वीरेंद्र पाटिल। लेकिन राजीव गांधी द्वारा पाटिल का अपमान कर मुख्यमंत्री पद से हटाने के बाद से लिंगायतों ने कांग्रेस को वोट नहीं दिए। हेगड़े के बाद येदियुरप्पा उनके पसंदीदा नेता रहे। 

2. वोक्कालिगा समुदाय

कर्नाटक की आबादी में 8 फीसदी हिस्सा रखने वाला वोक्कालिगा समुदाय 48 विधानसभा सीटों पर प्रभाव रखता है। इस बार यह सिद्धारमैया से नाराज दिखा। कांग्रेस को पिछली बार की तुलना में इस समुदाय के प्रभाव वाले आधी सीटों पर नुकसान हुआ है। जनता दल(एस) अपने प्रभावक्षेत्र में वोक्कालिगा समुदाय का समर्थन हासिल करने में सफल रही। बीजेपी को भी वोक्कालिगा समुदाय का समर्थन मिला है। 

3. दलित 

दलित प्रभाव वाले 38 सीटों पर बीजेपी को पहले की तुलना में इस बार काफी बढ़त हासिल है। पिछले चुनाव के मुकाबले बीजेपी को बहुत ज्यादा फायदा मिला है। हालांकि इन क्षेत्रों में बीजेपी और कांग्रेस को बराबर सीटें मिलती दिख रही हैं। कांग्रेस और जेडीएस को इन सीटों में नुकसान झेलना पड़ा है। 

4. पिछड़ा वर्ग 

भले ही देश में एससी/एसटी एक्ट के दौरान भाजपा विपक्षियों के निशाने पर रही और देशव्यापी आंदोलन हुआ। लेकिन कर्नाटक विधानसभा चुनाव में पिछड़ा वर्ग ने बीजेपी के साथ खड़ा दिखा है। पिछड़ा वर्ग के प्रभाव वाले 24 सीटों पर भाजपा को करीब दो तिहाई सीटें पर समर्थन मिला है। 

5.मुसलमान 

मुसलमानों को बीजेपी के विरोधी के तौर पर प्रचारित किया जाता है। लेकिन इन 17 सीटों पर प्रभाव रखने वाले इस समुदाय ने इस बार बीजेपी पर अपना विश्वास जताया है। इन क्षेत्रों में बीजेपी को कांग्रेस के बराबर सीटें मिलती दिख रही हैं, जो पिछले चुनाव की तुलना में बीजेपी को फायदा और कांग्रेस और जेडी(एस) को नुकसान है। 

6. आदिवासी 

10 सीटों पर प्रभावी आदिवासी समुदाय इस चुनाव में कांग्रेस के समर्थन में खड़ा नजर आया। हालांकि यहां भी बीजेपी और जेडीएस को पिछले चुनाव के मुकाबले सीटों का फायदा हुआ है। 

7. देवगौड़ा का प्रभाव क्षेत्र

एचडी देवगौड़ा के प्रभाव वाले क्षेत्र में 33 सीटों में जेडी(एस) अपनी सीटें बचाने में कामयाब हुई है। इस क्षेत्र में बीजेपी के सभी उम्मीदवार जीत गए हैं और कांग्रेस के सभी उम्मीदवार हार गए हैं। 

8. सिद्धारमैया का प्रभाव क्षेत्र 

सिद्धारमैया के प्रभाव क्षेत्र वाले 50 सीटों पर कांग्रेस पिछले चुनाव के मुकाबले भारी नुकसान झेलना पड़ा है। वहीं बीजेपी को जबरदस्त फायदा हुआ है। जेडीएस को भी जहां पिछले चुनाव में कोई सीट नहीं मिली थी उसे भी कुछ सीटें मिली हैं। 
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9. येदियुरप्पा का प्रभाव क्षेत्र 

येदियुरप्पा के प्रभाव क्षेत्र वाले 49 सीटों में बीजेपी का भारी सफलता और कांग्रेस को बुरी तरह शिकस्त मिली है। जेडीएस को मामूली फायदा हुआ है। 
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