यह तो सभी जानते हैं कि उत्तर प्रदेश के नोएडा में जो मुख्यमंत्री आया उसकी कुर्सी चली गई, लेकिन क्या आपको मालूम है कि कर्नाटक में भी चामराजनगर एक ऐसा जिला है जिसका दौरा करने वाले मुख्यमंत्री चुनाव हार जाते हैं। कांग्रेस के सिद्धारमैया ने इस अंधविश्वास को दूर करने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुए। अपने कार्यकाल में नौ बार चामराजनगर जाने वाले सिद्धारमैया अक्सर कहा करते थे कि पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के लिए वहां जाना जरूरी है।
दरअसल, कर्नाटक में 40 साल बाद सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री के तौर पर पांच साल का कार्यकाल पूरा किया है। इससे पहले कांग्रेस के देवराज अर्स ने ऐसा किया था, लेकिन चामराजनगर का दौरा करने के बाद 1980 में हुए चुनाव में वह हार गए थे। तभी से चामराजनगर का अंधविश्वास कायम है। उर्स के बाद सीएम बनने वाले आर गुंडु राव, राम कृष्ण हेगड़े, एसआर बोम्मई और वीरेंद्र पाटिल भी जब वहां का दौरा करने के बाद हार गए तो चामराजनगर को मुख्यमंत्रियों का कब्रिस्तान कहा जाने लगा।
कुमारस्वामी ने 17 साल बाद किया था दौरा
एचडी कुमारस्वामी ने 17 साल बाद मई, 2007 में चामराजनगर का दौरा किया था। हालांकि खुद कुमारस्वामी ने बताया था कि उनके शुभचिंतकों और परिजनों ने उन्हें वहां नहीं जाने की सलाह दी थी। उनके बाद सीएम बनने वाले बीएस येदियुरप्पा और डीवी सदानंद गौड़ा ने कभी इस जिले की यात्रा नहीं कि लेकिन उनके उत्तराधिकारी जगदीश शेट्टार मई, 2013 में चुनाव से पहले वहां गए थे और इसके बाद जो हुआ वह इतिहास है। भाजपा सत्ता से बाहर हो गई थी और सिद्धारमैया मुख्यमंत्री बने थे। मोदी के चामराजनगर नहीं जाने पर सिद्धारमैया ने चुटकी लेते हुए कहा था कि पीएम वहां जाने से डरते हैं क्योंकि उन्हें अपनी कुर्सी जाने का खतरा है।