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4 साल में एक PC नहीं कर पाए मोदी, अपनी असफलताओं का कांग्रेस पर फोड़ते हैं ठीकरा : मनमोहन

Mon, 07 May 2018 03:48 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
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मनमोहन सिंह
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कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जहां देश की दोनों बड़ी पार्टियां ऐड़ी-चोटी का जोर लगाकर लोगों को लुभाने की कोशिश कर रही है। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी अपनी पार्टी के लिए प्रचार करते हुए मोदी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने वर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को अच्छा नेता बताते हुए कहा कि उन्होंने राज्य के लोगों को गतिशील नेतृत्व प्रदान किया है। यहां के चुनाव नतीजों का देश की राजनीति पर असर पड़ेगा।

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केंद्र सरकार पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का आर्थिक प्रबंधन धीरे-धीरे बैंकिंग प्रणाली में लोगों के विश्वास को मिटा रही है। हालिया घटनाओं जिसमें देश के कई राज्यों के लोगों को नकदी का सामना करना पड़ा, इसे रोका जा सकता था।

पूर्व प्रधानमंत्री सिंह ने कहा कि मोदी सरकार ने दो भयंकर भूल की हैं जिन्हें रोका जा सकता था। इनमें नोटबंदी और जल्दी से जीएसटी को लागू करना शामिल है। इन भूलों की वजह से हमारी अर्थव्यवस्था को नुकसान हुआ है। इसके अलावा हमारे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्रों को नुकसान पहुंचा है जिसकी नतीजा यह हुआ कि लाखों नौकरियां चली गईं।
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सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने विरोधियों के बारे में जैसा बोलते हैं वह आज तक किसी पीएम ने अपने पद रहते हुए नहीं कहा था। किसी पीएम द्वारा गरिमा गिरकार इस तरह की बातें करना शोभा नहीं देता है और यह देश की राजनीति के लिए भी सही नहीं है।

सिंह ने कहा कि सिद्धारमैया सरकार ने कर्नाटक को गुजरात से बेहतर बनाया है। मोदी सरकार अमेरिका में प्रोफेशनल्स की नौकरियां और आयात को बचाने में नाकाम रही है। दावोस में जब प्रधानमंत्री की नीरव मोदी के साथ तस्वीर सामने आई थी तब कांग्रेस ने कहा था कि नीरव पीएम के साथ था। जिसपर आज मनमोहन ने दावा करते हुए कहा कि पीएम दावोस में नीरव मोदी की कंपनी में मौजूद थे और इसके कुछ दिनों बाद वह देश छोड़कर भाग गया।
 

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मनमोहन सिंह
मोदी सरकार के कामकाज पर मनमोहन ने कहा कि सरकार आश्चर्यजनक रूप से काम कर रही है और इसका नतीजा हमें दिखाई दे रहा है। नीरव मोदी के मामले पर मनमोहन ने कहा कि निश्चित तौर पर साल 2015-16 के दौरान मोदी को लेकर कुछ खलबली थी। हालांकि इसका मोदी सरकार से कोई लेना-देना नहीं है लेकिन यदि इल्जाम लगाया जाना है तो सरकार इसके लिए जिम्मेदार है।

लोगों का ध्रुवीकरण करने की जिस तरह की कोशिश पीएम द्वारा किया जा रहा है वह देश के लिए सही नहीं है। मोदी के लिए 70 साल के कांग्रेसी शासन को अपनी असफलताओं के लिए जिम्मेदार ठहराना बहुत आसान है। 

2015 में अलर्ट के बावजूद मोदी सरकार ने कुछ नहीं किया। देश छोड़कर भागने से दो दिन पहले नीरव पीएम के साथ दावोस में मौजूद था। यह अपने आप सच्चाई को बयां करता है। पिछले चार सालों के दौरान मोदी एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। 
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