कर्नाटक में विधानसभा चुनाव होने में कुछ ही दिनों का समय बचा है। ऐसे में राजनेता मतदाताओं को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। जहां चेहरे पर मुस्कुराहट लेकर नेता घर-घर जाकर लोगों से अपने पक्ष में वोट डालने की अपील कर रहे हैं। वहीं उन्हें बदले में लोगों के तीखे सवालों के साथ ही घेराव का सामना करना पड़ रहा है। मतदाता पूछ रहे हैं कि उनसे किए गए वादों का क्या हुआ। पिछले 10 दिनों में अभी तक इस तरह की कम से कम दो दर्जन घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
इन घटनाओं में मौजूदा मंत्रियों और विपक्षी उम्मीदवारों से लोग बुनियादी सुविधाएं तक ना दे पाने की वजह से सवाल पूछ रहे हैं। इस मामले पर नेशनल इलेक्शन वॉच के संस्थापक सदस्य त्रिलोचन शास्त्री ने बताया कि यह एक नया ट्रेंड है। मतदाता अब उन चीजों को खुलेतौर पर कर रहे हैं जिसे वह पहले निजी तौर पर सोचा करते थे। मतदाताओं के नाराज होने के बहुत से कारण हैं। धारवाड़ जिले से दोबारा चुनाव लड़ रहे श्रम मंत्री संतोष लाड को खराब सड़कों और खराब बुनियादी सुविधाओं की वजह से लोगों का गुस्सा झेलना पड़ा।
नागरिकों ने आरोप लगाया है कि पिछले
चुनाव के दौरान जिम बनाने के वादे को लाड पूरा नहीं कर पाए हैं। लोगों ने उनके खिलाफ नारे लगाए। जिसके बाद मंत्री वहां से चले गए। मैसूर में प्राथमिक शिक्षा मंत्री तनवीर सैत को भी लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा। एक कन्नड़
कार्यकर्ता परमेश ने उनसे पूछा कि हमने आपको और आपके पिता को वोट दिया था। तो फिर क्यों इस क्षेत्र की सड़कों की मरम्मत नहीं हुईं? आपको इससे क्यों कोई फर्क नहीं पड़ता।
केवल कांग्रेस ही नहीं भाजपा नेताओं को भी लोगों के रोष का सामना करना पड़ रहा है। हुबली-धारवाड़ सेंट्रल से चुनाव लड़ रहे भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार को निर्वाचन क्षेत्र का विकास ना करने की वजह से लोग उनसे नाराज हैं। बिदार से बिजनेसमैन और कांग्रेस उम्मीदवार अशोक खेनी को लोगों के आक्रामक रवैये का शिकार होना पड़ा क्योंकि वह अपने निर्वाचन क्षेत्र के दो गांवों को मिनी-सिंगापुर में बदलने के अपने पिछले चुनावी वादे को पूरा नहीं कर पाए हैं।