Karnataka Election 2023: bjp-congress
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10 मई को कर्नाटक की 224 सीटों पर मतदान होगा और 13 मई को नतीजे आएंगे। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद का कहना है चुनाव बहुत रोचक होगा। पार्टी के एक पूर्व महासचिव कहते हैं कि केंद्रीय बजट सत्र में कर्नाटक विधानसभा चुनाव को देखकर सत्ता पक्ष की तरफ से बड़ा दांव खेला गया है, लेकिन वह सफल नहीं होगा। कर्नाटक विधानसभा चुनाव का नतीजा 2024 में लोकसभा के चुनाव तक माहौल बना देगा। कर्नाटक सरकार के मंत्री और वरिष्ठ नेता ईश्वरप्पा का कहना है कि सपने देखने का सभी को अधिकार है। भाजपा मुख्यालय के वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस मामले में पार्टी के प्रवक्ता बोलेंगे। हमें केवल इतना कहना है कि अभी देश में प्रधानमंत्री मोदी का कोई राजनीतिक विकल्प नहीं है।
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कर्नाटक विधानसभा में असल की राजनीतिक लड़ाई दो दलों के बीच में है। पांच अप्रैल को कांग्रेस पार्टी के पूर्व सांसद राहुल गांधी कोलेरा में पांच अप्रैल को जनसभा को संबोधित करेंगे। कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का गृह राज्य है। इसलिए इस बार खरगे की नैतिक जिम्मेदारी भी काफी बढ़ गई है। राहुल गांधी के सचिवालय के सू्त्र बताते हैं कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव में सफलता पाने के लिए पार्टी ने पूरा जोर लगाया है। वहां चुनाव प्रचार में प्रियंका गांधी भी जाएंगी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैय्या समेत अन्य पिछले 15 दिन से कभी भी चुनाव की तारीखों के एलान होने का इंतजार कर रहे थे। उडुड्पी से ताल्लुक रखने वाले कर्नाटक कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि लोग समीकरण चाहें जो बनाएं या बिगाड़ें, हवा कांग्रेस के पक्ष में है। भाजपा के कई नेता कांग्रेस में शामिल हो गए हैं और कई शामिल होने के लिए तैयार हैं। मुख्यमंत्री बसावराज बोम्मई खुद इस तरह के हालात को लेकर आशंकित हैं। यह राज्य में भाजपा की सरकार से जनता की निराशा का सबसे बड़ा सबूत है।
सिर मुंड़ाते ही पड़ रहे हैं ओले
चुनाव आयोग ने चुनाव तारीख की घोषणा की। इस घोषणा से दो दिन पहले चेन्नागिरि से पार्टी के विधायक मदल विरुक्षपा रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार हो गए। उनके आवास से इसके पहले जांच अधिकारियों को छह करोड़ रुपये और बेटे के कार्यालय से दो करोड़ रुपये नकद मिल चुके हैं। इससे ठीक दो सप्ताह पहले भाजपा नेता पुत्तन्ना ने कांग्रेस का दामन थाम लिया था। वरिष्ठ नेता मंजूनाथ कुन्नूर, केआर पीट, बाबूराव चिंचिनासुर भाजपा को छोड़कर कांग्रेस में शामिल चुके हैं। भाजपा के भीतर एक चर्चा और है। वह यह कि हिमाचल और गुजरात विधानसभा चुनाव में बड़े पैमाने पर विधायकों के टिकट कटे थे। इसे लेकर अंदरुनी चर्चा काफी है। कहा यह भी जा रहा है कि पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के तमाम नेता अपने बूते चुनाव जीते थे। इसलिए पार्टी अपने विधायकों और नेताओं का असंतोष दबाने के भारी दबाव में है। मुख्यमंत्री बसावराज बोम्मई ने भी कहा कि कांग्रेस भाजपा के नेताओं को टिकट देने का लालच दे रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा अधिकतम मौजूदा विधायकों को चुनाव लड़ाने की रणनीति पर अमल कर सकती है। इस बार वेल्लारी और आस-पास 15-20 विधानसभा सीटों पर असर रखने वाले जर्नादन रेड्डी ब्रदर्स भी नाराज हैं।
हारी बाजी जीतने की कला जानते हैं भाजपा रणनीतिकार
कर्नाटक में भाजपा को अपने नेता पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा पर बड़ा भरोसा है। प्रधानमंत्री मोदी उन्हें अपने विश्वसनीयों में गिनते हैं। येदियुरप्पा के नेतृत्व में ही पार्टी ने कर्नाटक में पहली बार कमल खिलाया था। लिंगायत समुदाय का येदियुरप्पा को समर्थन हासिल है। मुख्यमंत्री बसावराज बोम्मई और येदियुरप्पा समानांतर रणनीति पर काम करके सरकार में वापसी की तस्वीर बनाने में जुटे हैं। दिल्ली से केंद्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान, मनसुख मंडाविया समेत तमाम नेता लगातार सक्रिय हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह खुद कर्नाटक में हर डेवलपमेंट पर बारीक नजर रखकर चल रहे हैं। दीन दयाल उपाध्याय मार्ग स्थित भाजपा मुख्यालय के सूत्र बताते हैं कि मौजूदा समय में जेपी नड्डा के पास कर्नाटक में भाजपा की वापसी का लक्ष्य ही मिशन मोड पर है। बताते चलें कि संगठन मंत्री बीएल संतोष भी कर्नाटक से हैं। येदियुरप्पा से समीकरण बहुत अनुकूल नहीं है, लेकिन तमाम स्थितियों को साधकर भाजपा के रणनीतिकार फिलहाल राज्य पर ही फोकस कर रहे हैं। कर्नाटक से आने वाले एक सांसद बताते हैं कि राज्य की 63 सीटें ऐसी हैं, जहां हमें कभी सफलता नहीं मिली है। लेकिन 2023 में इन 63 सीटों पर तस्वीर बदली हुई दिखाई देने की पूरी उम्मीद है। वह कहते हैं सरकार तो भाजपा ही बनाएगी।
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के मायने क्या हैं?
कांग्रेस पार्टी ने कर्नाटक में भ्रष्टाचार को बड़ा मुद्दा बनाया है। कांग्रेस के पूर्व सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर फिर उद्योगपति अदाणी समेत तमाम भ्रष्टाचारियों को शह देने का सीधा आरोप मढ़ दिया है। यह कोई पहला मौका नहीं है, जब राहुल ने प्रधानमंत्री को आरोपों के घेरे में लिया है। वह 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले चौकीदार चोर है का नारा लगा चुके हैं। पांच साल पहले कर्नाटक में उन्होंने भ्रष्टाचार पर हमला बोला था और उस बयान के कारण ही उनकी संसद सदस्यता छिनी है। भाजपा के रणनीतिकार कांग्रेस पार्टी के भ्रष्टाचार के आरोप और राजनीतिक हमलों को राहुल गांधी की अपरिपक्व राजनीति से जोड़ने में जुटे हैं। प्रधानमंत्री ने 28 मार्च को खुद भाजपा मुख्यालय से विपक्ष पर कड़ा हमला बोला था। प्रधानमंत्री ने उल्टे आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए हल्ला मचा रहा है। एकजुट हो रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव में सफलता पाने के बाद भाजपा की आगे की राह काफी आसान हो जाएगी। वहीं असफलता छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्यप्रदेश के आगामी चुनाव में मुसीबत बढ़ा सकती है। इसका असर 2024 में आम चुनाव पर पड़ने से भी इनकार नहीं किया जा सकता।