कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच चल रही खींचतान पर कांग्रेस आलाकमान के दखल के बाद विराम लग चुका है। इसके बावजूद कर्नाटक में डिनर पॉलिटिक्स रुकती नहीं दिख रही है। सिद्धारमैया हों या डीके शिवकुमार, कांग्रेस के दोनों ही नेता रात्रिभोज के जरिये लगातार शक्ति प्रदर्शन में जुटे हुए हैं।
न्यूज एजेंसी पीटीआई ने आधिकारिक सूत्रों के हवासे से बताया कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मंत्रियों और विधायकों के एक समूह के साथ 18 दिसंबर को वरिष्ठ मंत्री सतीश जारकीहोली की तरफ से आयोजित रात्रिभोज में हिस्सा लिया।
सिद्धारमैया के करीबी माने जाने वाले जारकीहोली के आवास पर आयोजित रात्रिभोज बैठक ने मुख्यमंत्री पद को लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर चल रहे सत्ता संघर्ष के बीच नई अटकलों को हवा दे दी है। सूत्रों के अनुसार, रात्रिभोज में मौजूद लोगों में मंत्री जी परमेश्वर, एचसी महादेवप्पा, बीजेड जमीर अहमद खान, एमसी सुधाकर और विधायक एएस पोन्नन्ना और नसीर अहमद शामिल थे। ये सभी सिद्धारमैया के करीबी माने जाते हैं।
यह बैठक 17 दिसंबर की रात को आयोजित रात्रिभोज के बाद हुई, जहां जारकीहोली ने एक होटल में तीस से ज्यादा 'समान विचारधारा वाले' विधायकों की मेजबानी की थी। हालांकि सिद्धारमैया इसमें शामिल नहीं हुए, लेकिन उनके बेटे और एमएलसी यतींद्र सिद्धारमैया, उनके करीबी और विधायक केएन राजन्ना सहित कई लोग मौजूद थे।
उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने रात्रिभोज के संबंध में शुक्रवार को संवाददाताओं के एक प्रश्न का उत्तर देते हुए पूछा, 'रात्रिभोज के लिए मिलने में क्या गलत है?' उन्होंने कहा, 'उन्हें खाना खाने दो, यह खुशी की बात है। क्या हम कह सकते हैं कि खाना मत खाओ?'
शिवकुमार से जब यह कहा गया कि बैठक में केवल कुछ ही लोग उपस्थित थे, तो उन्होंने जवाब दिया, 'मुझे इस पर टिप्पणी क्यों करनी चाहिए? वे रात के खाने पर मिले थे। हम सभी (सत्र के लिए) अन्य स्थानों से आए हैं। अगर सभी लोग (रात के खाने पर) मिलते हैं तो इसमें क्या गलत है?'
ये रात्रिभोज बैठकें बेलगावी के बाहरी इलाके में शिवकुमार के साथ रात्रिभोज करने के लिए कुछ मंत्रियों सहित 30 से अधिक कांग्रेस विधायकों के मिलने के एक सप्ताह बाद हो रही हैं। हालांकि कुछ मौजूद लोगों ने राज्य विधानमंडल के चल रहे शीतकालीन सत्र के दौरान इन बैठकों को 'अनौपचारिक रात्रिभोज' कहकर खारिज कर दिया। वहीं अन्य लोगों ने सुझाव दिया कि राज्य में राजनीतिक घटनाक्रमों पर चर्चा की गई।
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