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Karnataka: विधानसभा में डीके शिवकुमार के RSS गीत गाने पर बवाल, कांग्रेस MLC ने पूछा- किसे खुश करना चाहते हैं?

Mon, 25 Aug 2025 05:27 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू

सार

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार द्वारा विधानसभा में आरएसएस गीत गाने पर विवाद गहराया है। कांग्रेस एमएलसी बीके हरिप्रसाद ने माफी की मांग करते हुए इसे पार्टी की विचारधारा से समझौता बताया। वहीं, शिवकुमार ने खुद को जन्मजात कांग्रेसी बताया और कहा कि वे दूसरों की विचारधारा को समझने में गलत नहीं मानते।
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कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार द्वारा विधानसभा में आरएसएस का गीत गाने पर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ एमएलसी बीके हरिप्रसाद ने इस कदम पर कड़ा एतराज जताते हुए शिवकुमार से माफी मांगने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने सवाल किया कि आखिर शिवकुमार किसे खुश करना चाहते हैं।
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एमएलसी हरिप्रसाद ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि अगर किसी संगठन का गीत गाता है तो आपत्ति नहीं, लेकिन कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष होते हुए शिवकुमार को ऐसा नहीं करना चाहिए था। उन्होंने याद दिलाया कि आरएसएस को स्वतंत्र भारत में तीन बार प्रतिबंधित किया जा चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवकुमार का यह कदम गांधीजी की हत्या से जुड़े संगठन की विचारधारा को बढ़ावा देने जैसा है।

कांग्रेस मंत्रियों का बचाव
इस बीच, कर्नाटक सरकार के मंत्री एचसी महादेवप्पा और विधायक तनवीर सैत ने शिवकुमार का बचाव किया। महादेवप्पा ने कहा कि आरएसएस गीत गाने का मतलब यह नहीं कि शिवकुमार भाजपा में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा सेक्युलरिज्म, लोकतंत्र और संविधान की रक्षा करेगी और किसी भी तरह के धार्मिक उग्रवाद का विरोध करेगी।
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शिवकुमार की सफाई
शिवकुमार ने खुद को जन्मजात कांग्रेसी बताया। उन्होंने कहा कि वे अपनी पार्टी की विचारधारा से समझौता नहीं करेंगे, लेकिन दूसरों की विचारधारा को समझना गलत नहीं है। उनके मुताबिक, उनका मकसद सिर्फ यह जताना था कि वे भी हिंदू हैं। इस बयान ने साफ कर दिया कि वे भाजपा या आरएसएस से जुड़ने के इरादे से यह गीत नहीं गा रहे थे।
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कांग्रेस में असमंजस और सियासी मायने
हालांकि, कांग्रेस खेमे में इस मुद्दे पर असमंजस साफ दिख रहा है। एक ओर पार्टी के वरिष्ठ नेता हरिप्रसाद जैसे लोग इसे विचारधारा से समझौता मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पार्टी के अन्य नेता इसे सामान्य घटना बताकर टालने की कोशिश कर रहे हैं। इस विवाद ने कर्नाटक की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है कि क्या कांग्रेस नेता आरएसएस के साथ किसी तरह की नजदीकी बढ़ा रहे हैं।

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