कर्नाटक के कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने राज्य में आरक्षण के मुद्दे को खत्म करने को कहा है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार आते ही आरक्षण के मुद्दे को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाएगा। साथ ही अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि हमने बिना किसी परेशानी के दो सूचियां बना ली हैं, जबकि भाजपा अभी तक एक सूची भी आगे नहीं बढ़ा पाई है।
मुसलमानों का 4 प्रतिशत आरक्षण खत्म
बता दें, कर्नाटक में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा की सरकार ने बड़ा दांव खेला है। मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के नेतृत्व वाली सरकार ने मुसलमानों के लिए आवंटित 4 प्रतिशत आरक्षण को खत्म कर दिया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, सूबे में करीब 13 प्रतिशत मुस्लिमों की आबादी है। यही कारण है कि भाजपा सरकार के इस फैसले के खिलाफ सियासत तेज हो गई है।
किच्छा सुदीप पर हमला
कांग्रेस अध्यक्ष ने भाजपा का समर्थन कर रहे किच्छा सुदीप पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि बहुत सारे फिल्मी सितारे आते जाते रहते हैं। फिल्म और राजनीति दो अलग-अलग चीजें हैं। उन्होंने आगे कहा कि सुदीप के समर्थन से चुनाव पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इतने सारे फिल्मी सितारे आते और चले जाते हैं। राजनीति फिल्मों से अलग है। गौरतलब है, किच्छा सुदीप ने बुधवार को घोषणा की थी कि वह न तो भाजपा में शामिल होंगे और न ही चुनाव लड़ेंगे। हालांकि चुनाव में मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई का समर्थन करेंगे। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री बोम्मई ने कहा कि कन्नड़ सुपरस्टार के प्रचार से पार्टी को काफी ताकत मिलेगी।
10 मई को चुनाव
कर्नाटक में 10 मई को विधानसभा चुनाव होंगे और वोटों की गिनती 13 मई को होगी। 2018 के विधानसभा चुनावों में, बीजेपी ने 104 सीटें जीतीं और सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी, जबकि कांग्रेस और जेडी (एस) ने क्रमशः 78 और 37 सीटें हासिल कीं।
मुस्लिम और दलित आरक्षण पर जंग
कर्नाटक में इस वक्त आरक्षण के दो मुद्दे काफी गर्म हैं। इसमें पहला मुस्लिम आरक्षण है। दो दिन पहले यानी 27 मार्च 2023 को ही कर्नाटक की भाजपा सरकार ने मुस्लिमों को मिलने वाला 4% आरक्षण खत्म कर दिया। एक रिपोर्ट के अनुसार, सूबे में करीब 13 प्रतिशत मुस्लिमों की आबादी है। यही कारण है कि भाजपा सरकार के इस फैसले के खिलाफ सियासत तेज हो गई है।
आरक्षण को फिर से लागू करने की घोषणा
कांग्रेस-जेडीयू दोनों ही एलान कर चुके हैं कि अगर सूबे में उनकी सरकार बनती है तो वह इस आरक्षण को फिर से लागू करेंगे। वहीं, भाजपा का कहना है कि कांग्रेस और जेडीएस मुस्लिम वोटों के चक्कर में ऐसा वादा कर रही हैं। कर्नाटक में मुस्लिमों को पहली बार आरक्षण 1994 में एचडी देवगौड़ा सरकार में दिया गया। मुस्लिमों को सामाजिक आधार पर पिछड़ा मानते हुए उन्हें सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण दिया गया था।
मुस्लिमों का आरक्षण दो समुदाओं में बंटा
आरक्षण का दूसरा मुद्दा बंजारा समुदाय से जुड़ा है। इसी महीने कर्नाटक सरकार ने मुस्लिम समुदाय को मिलने वाले चार प्रतिशत आरक्षण को दो प्रमुख समुदायों, वीरशैव-लिंगायत और वोक्कालिगा में बांटा। पहले वोक्कालिगा समुदाय को चार फीसद आरक्षण मिलता था, इसे बढ़ाकर छह प्रतिशत कर दिया गया है। पंचमसालियों, वीरशैवों के साथ अन्य लिंगायत कैटेगरी के लिए अब सात प्रतिशत आरक्षण होगा। पहले यह पांच प्रतिशत था।
अनुसूचित जाति का आरक्षण कम
राज्य का बंजारा समुदाय इसका विरोध कर रहा है। फैसला आते ही भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा के घर और दफ्तर पर इस समुदाय के लोगों ने पथराव किया। उनका कहना है कि अनुसूचित जाति का आरक्षण कम कर दिया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य में करीब 20% इनकी संख्या है। पहले इन्हें 17% आरक्षण मिल रहा था। 27 मार्च 2023 को दलितों का आरक्षण कई हिस्सों में बांट दिया गया। इसी बात पर इनकी नाराजगी है।